Story
विश्लेषक: अमेरिकी समर्थन के बावजूद जापानी येन में स्थायी सुधार की संभावना कम

यार्देनी रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, जापानी येन को समर्थन देने के अमेरिकी प्रयास लंबे समय तक सफल रहने की संभावना नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि जापान की घरेलू आर्थिक नीतियां, अमेरिका और जापान के बीच ब्याज दरों में बड़ा अंतर और कमजोर मुद्रा को लेकर जापान की प्राथमिकता इस हस्तक्षेप के खिलाफ काम कर रही हैं।
यह विश्लेषण तब आया है जब अमेरिका ने 2011 के बाद पहली बार येन के समर्थन में हस्तक्षेप किया, क्योंकि जापानी मुद्रा 1986 के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस कदम को "दोस्ती का संकेत" बताया, जबकि ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने येन को "बहुत अवमूल्यित" कहा।
हस्तक्षेप के सामने संरचनात्मक बाधाएं
येन में स्थायी सुधार के रास्ते में कई बड़ी बाधाएं हैं। यार्देनी रिसर्च के अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती जापान की अपनी आर्थिक नीतियां हैं।
- घरेलू आर्थिक एजेंडा: प्रधानमंत्री सनाई ताकाइची की सरकार का आर्थिक एजेंडा कमजोर मुद्रा से लाभान्वित होता है, क्योंकि इससे निर्यातकों और कॉर्पोरेट मुनाफे को बढ़ावा मिलता है। सरकार ने उपभोग कर को 8% से घटाकर 1% करने और कर्ज के माध्यम से $2.3 ट्रिलियन का निवेश कार्यक्रम शुरू करने की योजना बनाई है। एक मजबूत येन आयातित मुद्रास्फीति को तो कम कर सकता है, लेकिन यह निर्यात को कमजोर कर देगा, जो राजकोषीय प्रोत्साहन के प्रभाव को कम करेगा।
- ब्याज दरों का अंतर: अमेरिका और जापान के बीच ब्याज दरों में एक बड़ा संरचनात्मक अंतर बना हुआ है। बैंक ऑफ जापान (BOJ) ने अपनी नीतिगत दर को 1% से नीचे रखा है, जबकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगे भी सख्ती के संकेत दे रहा है। जापान के 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड लगभग 2.8% है, जो तीन दशकों में सबसे अधिक है, लेकिन यह अमेरिका के 4.7% के यील्ड से काफी कम है। यह अंतर डॉलर को आकर्षक बनाता है और येन-कैरी ट्रेड को प्रोत्साहित करता है।
हस्तक्षेप की प्रकृति और सीमाएं
Adविश्लेषकों ने अमेरिकी हस्तक्षेप के तरीके पर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, 31 जुलाई को अमेरिकी ट्रेजरी ने येन खरीदने के लिए डॉलर के बजाय यूरो बेचे।
यह कदम इस बात का संकेत देता है कि वाशिंगटन सीधे तौर पर डॉलर को कमजोर करने का इच्छुक नहीं था। यूरो का उपयोग करने से USD/JPY विनिमय दर पर हस्तक्षेप का प्रभाव कम हो गया और यह संकेत भी नहीं मिला कि अमेरिका अपनी डॉलर नीति में कोई बड़ा बदलाव कर रहा है।
बाजार का दृष्टिकोण
संक्षेप में, जब तक टोक्यो अपनी मौद्रिक या राजकोषीय नीतियों में बड़ा बदलाव नहीं करता या वाशिंगटन सीधे डॉलर बेचकर हस्तक्षेप नहीं करता, तब तक येन को किसी भी समन्वित कार्रवाई से केवल अस्थायी राहत मिलने की ही उम्मीद है। मूलभूत आर्थिक कारक येन पर दबाव बनाए रखेंगे, जिससे अमेरिकी समर्थन के स्थायी रूप से सफल होने की संभावना कम हो जाती है।