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डीजल उत्सर्जन मुकदमा: यूके में कार निर्माताओं ने जीता पहला दौर

Summary
लंदन की एक अदालत ने मर्सिडीज-बेंज, फोर्ड और अन्य प्रमुख कंपनियों के खिलाफ 'डिफीट डिवाइस' के अधिकांश आरोपों को खारिज कर दिया, जिससे उन्हें लगभग 16 लाख दावेदारों से जुड़े एक बड़े कानूनी मामले में शुरुआती बढ़त मिली है।
दुनिया की कुछ सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनियों ने ब्रिटेन में चल रही एक विशाल कानूनी लड़ाई का पहला चरण जीत लिया है। यह मामला डीजल वाहनों में कथित तौर पर उत्सर्जन नियंत्रण प्रणालियों को सीमित करने वाले प्रतिबंधित "डिफीट डिवाइस" के इस्तेमाल से जुड़ा है।
अदालत का फैसला
लंदन में न्यायाधीश सारा कॉकरिल ने अपने फैसले के सारांश में कहा कि उन्होंने "परीक्षण में जाँचे गए वाहनों के निर्माताओं के खिलाफ लगाए गए अधिकांश प्रमुख आरोपों को खारिज कर दिया है"। यह फैसला कार कंपनियों के लिए एक बड़ी राहत है, जो लाखों दावों का सामना कर रही हैं।
यह निर्णय अक्टूबर में शुरू हुए एक महत्वपूर्ण मुकदमे के बाद आया है, जिसमें पांच निर्माताओं द्वारा उत्पादित 20 नमूना वाहनों पर ध्यान केंद्रित किया गया था। इनमें मर्सिडीज-बेंज, फोर्ड, निसान, रेनो और स्टेलेंटिस के स्वामित्व वाले ब्रांड प्यूज़ो और सिट्रोएन शामिल थे।
Adमामले का विवरण और अपवाद
हालांकि फैसला मोटे तौर पर कार निर्माताओं के पक्ष में था, न्यायाधीश कॉकरिल ने कुछ प्रतिकूल निष्कर्ष भी दिए। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि सिट्रोएन वाहन में दहन का "स्प्लिट मोड" एक डिफीट डिवाइस के बराबर है, जो वादी के लिए एक आंशिक जीत है।
यह मुकदमा लगभग 16 लाख दावेदारों द्वारा लाए गए 13 मुकदमों के समूहों में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण सुनवाई थी। शुक्रवार का फैसला पांच कार निर्माताओं से जुड़े परीक्षण मामलों से संबंधित था, लेकिन यह अन्य निर्माताओं के खिलाफ लगभग 800,000 अन्य समान दावों पर भी बाध्यकारी होगा, जो इस फैसले के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।