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येन के लिए निर्णायक मोड़? जापान-अमेरिका के हस्तक्षेप के बाद 125 के स्तर का अनुमान

Summary
1998 के बाद पहली बार जापान और अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से येन खरीदने के बाद, विश्लेषकों का मानना है कि डॉलर-येन की जोड़ी अपने चरम पर पहुंच सकती है और येन में लंबी अवधि में बड़ी मजबूती की संभावना है।
विदेशी मुद्रा बाजार में जापान और अमेरिका द्वारा एक दुर्लभ संयुक्त हस्तक्षेप के बाद जापानी येन की दीर्घकालिक संभावनाओं को लेकर बाजार की उम्मीदें बदल रही हैं। एसेट मैनेजमेंट फर्म Eurizon SLJ Capital का मानना है कि यह कदम एक "निर्णायक मोड़" हो सकता है, जिससे डॉलर के मुकाबले येन की गिरावट पर लगाम लग सकती है।
हस्तक्षेप का विवरण और तत्काल प्रभाव
यह 1998 के बाद पहली बार है जब अमेरिका और जापान ने येन की लगातार गिरावट को रोकने के लिए मिलकर येन की खरीद की है। पिछले कुछ समय से, अमेरिका और जापान के बीच ब्याज दरों में बड़े अंतर के कारण येन पर भारी दबाव था, जिससे निवेशक जापानी संपत्ति बेचकर विदेशों में निवेश कर रहे थे। इसके चलते डॉलर के मुकाबले येन पिछले महीने 164 के करीब पहुंच गया था, जो दशकों का निचला स्तर है।
संयुक्त हस्तक्षेप के बाद येन में एक बार तेज उछाल देखा गया। हालांकि, बाद में इसमें कुछ नरमी आई और फिलहाल डॉलर-येन की जोड़ी 159.30 के आसपास कारोबार कर रही है, जो पिछले महीने के उच्चतम स्तर से अभी भी नीचे है।
विश्लेषकों का नजरिया
Eurizon SLJ Capital के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीफन जेन और अर्थशास्त्री जोआना फ्रेयर ने अपने ग्राहकों को भेजे एक नोट में कहा कि डॉलर-येन "संभवतः अपने चरम पर पहुंच गया है।" उनका मानना है कि इस हस्तक्षेप का मुख्य संकेत यह है कि अमेरिका और जापान दोनों ही डॉलर-येन की दर को नीचे लाना चाहते हैं।
Adफर्म ने येन के लिए एक अधिक आशावादी दीर्घकालिक दृष्टिकोण पेश किया है। Eurizon का अनुमान है कि येन अंततः 1 डॉलर के मुकाबले 125 के स्तर तक मजबूत हो सकता है। हालांकि, इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कोई विशिष्ट समय-सीमा नहीं दी गई है। मौजूदा स्तरों से यह 20% से अधिक की मजबूती का संकेत देता है।
हस्तक्षेप के पीछे के कारण
बाजार के कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस हस्तक्षेप में अमेरिका की भागीदारी सिर्फ येन को स्थिर करने के लिए नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी ट्रेजरी बाजार से भी जुड़ी हो सकती है। यदि येन में अनियंत्रित गिरावट जारी रहती, तो जापान को और हस्तक्षेप के लिए फंड जुटाने हेतु अपने विशाल अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड भंडार को बेचना पड़ सकता था। इससे अमेरिकी बॉन्ड बाजार पर दबाव बढ़ता और अमेरिका में लंबी अवधि की ब्याज दरें और बढ़ सकती थीं।
अमेरिकी कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन (CFTC) के आंकड़ों से पता चलता है कि हेज फंड्स ने येन में और गिरावट पर दांव लगाने वाली अपनी शॉर्ट पोजीशन (मंदी की स्थिति) को कम कर दिया है। यह दर्शाता है कि सट्टा लगाने वाले निवेशक अब येन को शॉर्ट करने के जोखिमों का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। बाजार की नजर अब इस बात पर होगी कि क्या दोनों देश फिर से हस्तक्षेप करते हैं और क्या उनकी मौद्रिक नीतियों में कोई बदलाव होता है जो ब्याज दर के अंतर को कम कर सके।