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फेड के आक्रामक रुख के बाद अमेरिकी स्टॉक वायदा में सुधार

Summary
फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद वॉल स्ट्रीट में आई गिरावट के बाद अमेरिकी स्टॉक वायदा में गुरुवार शाम को तेजी देखी गई। मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीदों से भी बाजार को समर्थन मिला।
फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा तीन वर्षों में पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद वॉल स्ट्रीट में आई गिरावट के बाद, अमेरिकी स्टॉक इंडेक्स वायदा में गुरुवार शाम को सुधार देखा गया। बाजार को मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों से भी बल मिला, जिससे तेल की कीमतों में गिरावट आई।
फेड का फैसला और वॉल स्ट्रीट पर असर
बुधवार को, फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की, जिससे दर 4.0% हो गई। यह तीन साल में केंद्रीय बैंक द्वारा पहली दर वृद्धि थी। बैठक के बाद, फेड के अध्यक्ष केविन वार्श ने एक आक्रामक रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि मुद्रास्फीति अभी भी "बहुत अधिक" है और वित्तीय स्थितियाँ पर्याप्त रूप से प्रतिबंधात्मक नहीं हैं।
इन टिप्पणियों को बाजार ने भविष्य में और अधिक दरों में बढ़ोतरी के संकेत के रूप में लिया, जिससे बुधवार को वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट आई। उच्च ब्याज दरें आमतौर पर इक्विटी बाजारों, विशेष रूप से प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं।
वायदा बाजार में रिकवरी
गुरुवार शाम को, बाजार ने कुछ रिकवरी के संकेत दिए। 20:05 ET (00:05 GMT) तक, प्रमुख वायदा सूचकांकों में निम्नलिखित बढ़त दर्ज की गई:
Ad- S&P 500 फ्यूचर्स: 0.48% बढ़कर 7,659.0 अंक पर।
- नैस्डैक 100 फ्यूचर्स: 0.67% बढ़कर 29,446.50 अंक पर।
- डॉव जोन्स फ्यूचर्स: 0.50% बढ़कर 52,175.0 अंक पर।
नैस्डैक वायदा में बढ़त से प्रौद्योगिकी शेयरों में तेज वापसी की संभावना का संकेत मिलता है। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह सुधार फेड के फैसले के बाद हुई बिकवाली पर एक तकनीकी प्रतिक्रिया हो सकती है।
भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का प्रभाव
बाजार की धारणा को रॉयटर्स की एक रिपोर्ट से भी समर्थन मिला, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी अधिकारियों ने यमन के हूती विद्रोहियों के साथ गुप्त बातचीत की है। इस खबर से मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद जगी है, जिसके कारण तेल की कीमतों में हाल की ऊँचाइयों से तेज गिरावट आई है। तेल की कीमतों में कमी से मुद्रास्फीति की चिंताएं कुछ हद तक कम होती हैं, जो इक्विटी बाजारों के लिए एक सकारात्मक कारक है।