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अमेरिकी ट्रेजरी की योजनाओं से डॉलर लगातार दूसरे महीने कमजोर, सितंबर में और गिरावट की आशंका

अमेरिकी डॉलर में अगस्त में लगातार दूसरे महीने गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की सरकारी बॉन्ड पुनर्खरीद में तेजी लाने की योजना ने नीतिगत दिशा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। वहीं, फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के बावजूद, वॉल स्ट्रीट के विश्लेषकों का अनुमान है कि सितंबर में डॉलर और कमजोर हो सकता है।
राजकोषीय और मौद्रिक नीति में टकराव
डॉलर पर दबाव का एक मुख्य कारण अमेरिकी ट्रेजरी सचिव बेसेन्ट द्वारा अपनाई गई अधिक सक्रिय ऋण प्रबंधन नीति है। इस महीने की शुरुआत में, ट्रेजरी ने सरकारी बॉन्ड पुनर्खरीद (बायबैक) के पैमाने का विस्तार करने की योजना की घोषणा की, जिसमें एकमुश्त बायबैक $4 बिलियन से अधिक हो सकता है। इस कदम ने विदेशी निवेशकों को चिंतित कर दिया है और यह अटकलें फिर से शुरू हो गई हैं कि अमेरिकी सरकार कमजोर डॉलर की नीति का समर्थन कर सकती है।
इसके विपरीत, फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वॉल्श ने मुद्रास्फीति को 2% के लक्ष्य पर वापस लाने के लिए अपने आक्रामक (हॉकिश) रुख को दोहराया है। उनके बयानों से बाजार में आगे ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें बढ़ी हैं, जो आमतौर पर डॉलर के लिए सकारात्मक होता है। हालांकि, ट्रेजरी की कार्रवाइयों ने इस समर्थन को बेअसर कर दिया है।
बाजार के आंकड़े और विश्लेषकों का नजरिया
ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स अगस्त में 0.9% गिरा, जो जुलाई में 1.3% की गिरावट के बाद आया है। यह इस साल आठ महीनों में पांचवां महीना है जब इंडेक्स में गिरावट आई है, और यह फरवरी के बाद से सबसे लंबी मासिक गिरावट की श्रृंखला है।
Adइस नीतिगत अनिश्चितता के जवाब में, हेज फंड और अन्य सट्टा निवेशकों ने डॉलर पर अपने तेजी के दांव (लॉन्ग बेट्स) कम कर दिए हैं। वेल्स फार्गो के रणनीतिकार एरिक नेल्सन का अनुमान है कि सितंबर में डॉलर और कमजोर हो सकता है। उनका मानना है कि फेडरल रिजर्व शायद उतनी ब्याज दरें न बढ़ा पाए जितनी बाजार उम्मीद कर रहा है, जिससे डॉलर पर फिर से मूल्य निर्धारण का दबाव बन सकता है।
आगे क्या erwartet है?
इन परस्पर विरोधी नीति संकेतों के कारण, विदेशी मुद्रा बाजार अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर अधिक संवेदनशील हो गया है। निवेशक फेड के अगले कदम का अनुमान लगाने के लिए हर नए डेटा पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
इस सप्ताह बाजार का ध्यान शुक्रवार को जारी होने वाली नवीनतम अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट पर केंद्रित रहेगा। यदि रोजगार और मुद्रास्फीति के आंकड़े कमजोर आते हैं, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरें स्थिर रख सकता है। लेकिन अगर आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं, तो दरों में और बढ़ोतरी की संभावना बढ़ जाएगी। बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के कारण डॉलर की अस्थिरता (volatility) भी बढ़ गई है, जो आने वाले हफ्तों में बड़े उतार-चढ़ाव का संकेत दे रही है।