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रिकॉर्ड मांग के बावजूद ईंधन की ऊंची कीमतों से एयरलाइन सेक्टर के मार्जिन पर दबाव

वैश्विक एयरलाइन सेक्टर 2026 में एक बड़े विरोधाभास का सामना कर रहा है। एक तरफ यात्रियों की मांग रिकॉर्ड स्तर पर है, तो दूसरी तरफ ईंधन की लागत में भारी उछाल ने उद्योग के मुनाफे के मार्जिन को आधा कर दिया है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
ईंधन की कीमतों का झटका और घटता मुनाफा
ईरान संघर्ष के कारण जेट ईंधन की कीमतों में आई तेजी इस सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) का अनुमान है कि 2026 में उद्योग का ईंधन बिल बढ़कर लगभग $350 बिलियन हो जाएगा, जो 2025 में लगभग $252 बिलियन था। इसके चलते ईंधन अब एयरलाइंस की परिचालन लागत का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बन गया है।
इस लागत वृद्धि के परिणामस्वरूप, IATA ने 2026 के लिए अपने वैश्विक लाभ के दृष्टिकोण को आधा कर दिया है।
- उत्तरी अमेरिकी एयरलाइंस: शुद्ध लाभ का अनुमान $12.4 बिलियन से घटकर $9.4 बिलियन रह गया है।
- यूरोपीय एयरलाइंस: शुद्ध लाभ का अनुमान $13.0 बिलियन से घटकर $9.6 बिलियन हो गया है।
- मध्य पूर्वी एयरलाइंस: सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं, जो $7.2 बिलियन के लाभ से $4.3 बिलियन के शुद्ध घाटे में जा सकती हैं।
मांग मजबूत, लेकिन मुनाफे पर असर
Adलागत के दबाव के बावजूद, यात्रियों की मांग में कोई कमी नहीं है। कुल राजस्व 9.4% बढ़कर लगभग $1.16 ट्रिलियन होने का अनुमान है। विमानों में यात्रियों की संख्या (लोड फैक्टर) 84% के रिकॉर्ड स्तर पर है, जो मजबूत मांग को दर्शाता है। 2026 फीफा विश्व कप जैसे आयोजनों से भी यात्रा की मांग को अतिरिक्त बढ़ावा मिल रहा है।
हालांकि, विरोधाभास यह है कि एयरलाइंस विमान तो भर रही हैं, लेकिन ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण प्रति यात्री मुनाफा कम हो रहा है। इसके अलावा, बोइंग और एयरबस से विमानों की डिलीवरी में हो रही देरी भी एक समस्या है, क्योंकि इसके कारण एयरलाइंस को पुराने और कम ईंधन-कुशल विमानों का उपयोग करना पड़ रहा है, जिससे लागत और बढ़ रही है।
विश्लेषकों का नजरिया और निवेशक के लिए संकेत
विश्लेषक इस सेक्टर को लेकर चयनात्मक रूप से आशावादी हैं। वे उन एयरलाइंस को पसंद कर रहे हैं जिनकी बैलेंस शीट मजबूत है, राजस्व के स्रोत विविध हैं (जैसे कॉर्पोरेट, प्रीमियम और लॉयल्टी प्रोग्राम) और जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी पकड़ है।
निवेशकों को दोतरफा स्थिति पर विचार करना चाहिए। एक ओर, मजबूत मांग, कॉर्पोरेट यात्रा में सुधार और प्रीमियम यात्रा पर खर्च करने वाले उपभोक्ता सकारात्मक संकेत हैं। दूसरी ओर, अगर भू-राजनीतिक तनाव बना रहता है तो ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं, और विमान डिलीवरी में देरी एक संरचनात्मक चुनौती है। वर्तमान ईंधन कीमतों पर, उद्योग का निवेश पर रिटर्न (4.3%) उसकी पूंजी की भारित औसत लागत (8.5%) से कम है, जो तकनीकी रूप से मूल्य क्षरण का संकेत देता है।