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BofA सर्वेक्षण: येन को लेकर निराशावाद चार साल के चरम पर, नीतिगत चिंताओं से बढ़ा दबाव

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Jul 13, 20262 min read
BofA सर्वेक्षण: येन को लेकर निराशावाद चार साल के चरम पर, नीतिगत चिंताओं से बढ़ा दबाव
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बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) ग्लोबल रिसर्च के एक नए सर्वेक्षण के अनुसार, जापानी येन के प्रति निवेशकों की धारणा पिछले चार वर्षों में अपने सबसे निराशावादी स्तर पर आ गई है। यह गिरावट जापान के मौद्रिक और राजकोषीय दृष्टिकोण पर बढ़ती चिंताओं के कारण है, जो अधिकारियों द्वारा मुद्रा में हस्तक्षेप के जोखिम पर भी भारी पड़ रही है।

सर्वेक्षण के मुख्य निष्कर्ष

BofA के जुलाई महीने के FX और रेट्स सेंटीमेंट सर्वे से पता चलता है कि येन को लेकर मंदी की धारणा 2022 के बाद से अपने चरम पर पहुंच गई है। सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश उत्तरदाताओं ने येन में और कमजोरी की आशंका के पीछे मुख्य कारण के रूप में बैंक ऑफ जापान (BoJ) और राजकोषीय नीति से जुड़े जोखिमों का हवाला दिया है।

हालांकि निवेशक जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित हस्तक्षेप के कारण सतर्क बने हुए हैं, लेकिन सट्टा आधारित पोजीशनिंग एक अलग कहानी बयां करती है। BofA ने CFTC के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लीवरेज्ड फंड्स ने येन में अपनी नेट शॉर्ट पोजीशन (बिकवाली की स्थिति) को 2007 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। यह इस बात का संकेत है कि बाजार अधिकारियों की चेतावनियों के बावजूद येन के खिलाफ बड़ा दांव लगा रहा है।

नीतिगत चिंताएं और ब्याज दरों का अंतर

येन पर यह दबाव ऐसे समय में आया है जब निवेशक इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या बैंक ऑफ जापान अमेरिका के साथ विशाल ब्याज दर के अंतर को कम करने के लिए अपनी नीति को पर्याप्त रूप से सख्त करेगा। अमेरिका में ट्रेजरी यील्ड्स में बढ़ोतरी और फेडरल रिजर्व द्वारा दरों को ऊंचा रखने की उम्मीदों ने डॉलर को लगातार मजबूती दी है, जिससे येन पर दबाव और बढ़ गया है।

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दिलचस्प बात यह है कि सर्वेक्षण में उत्तरदाताओं ने बैंक ऑफ जापान को उस प्रमुख केंद्रीय बैंक के रूप में देखा जो बाजार की अपेक्षा से अधिक दरें बढ़ा सकता है। हालांकि, कई लोगों का मानना है कि नीति को सामान्य करने की यह गति येन को ठोस समर्थन देने के लिए आवश्यक गति से बहुत पीछे रहेगी।

आगे की राह और बाजार का संदर्भ

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी डॉलर के मुकाबले येन 1986 के बाद के सबसे निचले स्तरों के करीब कारोबार कर रहा है, जिससे बाजार में हस्तक्षेप की आशंका बनी हुई है। नीति निर्माताओं पर बढ़ते दबाव का संकेत वित्त मंत्री कातायामा की हालिया टिप्पणियों से भी मिलता है, जिसमें उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति BoJ की जिम्मेदारी बनी रहनी चाहिए।

अब सभी की निगाहें बैंक ऑफ जापान की 30-31 जुलाई को होने वाली अगली नीतिगत बैठक पर टिकी हैं। व्यापक रूप से यह उम्मीद की जा रही है कि BoJ अपनी बेंचमार्क दर को अपरिवर्तित रखेगा और अपनी तिमाही आर्थिक और मुद्रास्फीति के पूर्वानुमानों को अपडेट करेगा।

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