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प्रैट एंड व्हिटनी का दावा: इंजन समस्या के कारण ग्राउंडेड विमानों की संख्या में 40% की कमी

Summary
जेट इंजन निर्माता प्रैट एंड व्हिटनी ने घोषणा की है कि इंजन संबंधी समस्याओं के कारण ग्राउंडेड विमानों की संख्या में अपने चरम से 40% की गिरावट आई है, जिससे विमानन उद्योग को राहत मिलने के संकेत हैं।
जेट इंजन निर्माता प्रैट एंड व्हिटनी ने घोषणा की है कि इंजन संबंधी समस्याओं के कारण ज़मीन पर खड़े विमानों की संख्या में अपने उच्चतम स्तर से 40% की कमी आई है। यह विमानन उद्योग के लिए एक बड़ी राहत का संकेत है, जो लंबे समय से इंजन की कमी और रखरखाव में देरी से जूझ रहा है।
क्या है पूरा मामला?
RTX की इकाई प्रैट एंड व्हिटनी के वाणिज्यिक इंजन अध्यक्ष रिक ड्यूर्लू ने मंगलवार को फ़ार्नबोरो, इंग्लैंड में एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह गिरावट एक अघोषित उच्चतम स्तर से मापी गई है।
ड्यूर्लू के अनुसार, छोटे विमानों, विशेष रूप से एयरबस A220 और एम्ब्रेयर E2 मॉडल के लिए, यह समस्या लगभग समाप्त हो गई है। कंपनी का लक्ष्य है कि आने वाले महीनों में इन छोटे विमानों के लिए ग्राउंडिंग की संख्या शून्य हो जाएगी।
विमानन उद्योग पर प्रभाव
प्रैट एंड व्हिटनी पिछले कुछ समय से रखरखाव में देरी और धातु संदूषण जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही थी। इन मुद्दों के कारण उद्योग में इंजन की कमी का संकट पैदा हो गया था, जिससे सैकड़ों विमानों को उड़ान भरने से रोकना पड़ा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक समय में लगभग 500 विमान इस समस्या से प्रभावित थे।
Adहालांकि ड्यूर्लू ने बड़े एयरबस A320neo जेट के ग्राउंडेड विमानों की सटीक संख्या नहीं बताई, लेकिन उन्होंने स्थिति में लगातार सुधार होने की बात कही। यह सुधार एयरलाइनों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि विमानों के ज़मीन पर रहने से उन्हें भारी वित्तीय नुकसान होता है।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
यह खबर प्रैट एंड व्हिटनी की मूल कंपनी RTX और उन एयरलाइनों के लिए सकारात्मक है जो इसके इंजनों का उपयोग करती हैं। इंजन की कमी का संकट कम होने से एयरलाइंस अपनी क्षमता बढ़ा सकती हैं और उड़ानों का बेहतर संचालन कर सकती हैं, जिससे उनके राजस्व में सुधार हो सकता है।
यह विकास विमानन क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं के कम होने का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। निवेशक इस पर बारीकी से नजर रखेंगे क्योंकि यह दर्शाता है कि उद्योग अपनी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक से उबर रहा है।