Story
ट्रम्प के मुकदमों के खिलाफ कैपिटल वन और जेपी मॉर्गन ने कानूनी लड़ाई का रास्ता चुना

अमेरिकी वित्तीय दिग्गज जेपी मॉर्गन चेस और कैपिटल वन ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके व्यवसायों द्वारा दायर किए गए हाई-प्रोफाइल मुकदमों में समझौता करने के बजाय कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम समझौता करने से उत्पन्न होने वाले बड़े जोखिमों से बचने की एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है।
क्या है पूरा मामला?
डोनाल्ड ट्रम्प और उनके व्यवसायों ने इन बैंकों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 2021 में राजनीतिक कारणों से उनके खाते बंद कर दिए। मुकदमों में दावा किया गया है कि बैंकों ने तथाकथित "वोक" एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए यह कार्रवाई की।
- मार्च 2025: ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन और एरिक ट्रम्प ने कैपिटल वन के खिलाफ मुकदमा दायर किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि बैंक ने 6 जनवरी, 2021 की कैपिटल हिल की घटनाओं के बाद राजनीतिक पूर्वाग्रह के कारण 300 से अधिक खाते बंद कर दिए।
- जनवरी 2026: डोनाल्ड ट्रम्प ने जेपी मॉर्गन और उसके सीईओ जेमी डिमन पर मुकदमा दायर किया, जिसमें बैंक पर गैर-कानूनी रूप से खाते बंद करने का आरोप लगाते हुए कम से कम $5 बिलियन का हर्जाना मांगा गया है।
बैंकों का बचाव और कानूनी स्थिति
दोनों बैंकों ने राजनीतिक प्रेरणा के आरोपों से इनकार किया है। कैपिटल वन ने जुलाई में एक संघीय अदालत को बताया कि खाते बंद करने का निर्णय एक आंतरिक एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) समीक्षा के बाद लिया गया था। वहीं, जेपी मॉर्गन ने ट्रम्प के मुकदमे को "आधारहीन" बताया है और कहा है कि वह राजनीतिक आधार पर खाते बंद नहीं करता है।
कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कानून आम तौर पर बैंकों के पक्ष में है। ग्राहक समझौतों में आमतौर पर बैंकों को खाते बंद करने का व्यापक विवेकाधिकार दिया जाता है, जिसका उपयोग बैंक अक्सर अपनी रक्षा में करते हैं।
Adसमझौता करने के बजाय लड़ने का जोखिम
हालांकि डोनाल्ड ट्रम्प जैसी हस्ती के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने में प्रतिष्ठा संबंधी जोखिम हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि समझौता करना अधिक खतरनाक हो सकता है। एक समझौते से यह धारणा बन सकती है कि बैंक ने गलत किया, जिससे "डीबैंकिंग" (बैंक द्वारा ग्राहकों को सेवाओं से वंचित करना) का आरोप लगाने वाले अन्य ग्राहकों द्वारा मुकदमों की बाढ़ आ सकती है।
एक संघीय बैंक नियामक, ऑफिस ऑफ द कंट्रोलर ऑफ द करेंसी (OCC), पहले से ही कई बैंकों के खिलाफ ऐसी लगभग 100,000 शिकायतों की जांच कर रहा है। यदि बैंक इन मामलों में समझौता करते हैं, तो यह भविष्य के मुकदमों और नियामक जांच के लिए एक नजीर स्थापित कर सकता है, जिससे उन्हें और अधिक वित्तीय नुकसान हो सकता है।
निवेशकों के लिए मायने
निवेशकों के लिए, यह कानूनी लड़ाई बैंकों के लिए परिचालन और प्रतिष्ठा संबंधी जोखिम को उजागर करती है, खासकर जब वे राजनीतिक रूप से संवेदनशील ग्राहकों के साथ काम करते हैं। इन मुकदमों का नतीजा अमेरिकी बैंकिंग उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम कर सकता है कि वे जोखिम प्रबंधन और खाता बंद करने की नीतियों को कैसे संभालते हैं। बैंकों द्वारा शीर्ष कानूनी फर्मों को नियुक्त करना यह दर्शाता है कि वे एक लंबी और महंगी कानूनी लड़ाई के लिए तैयार हैं, जिसे वे भविष्य के बड़े नुकसान से बचने के लिए आवश्यक मानते हैं।