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सोना 8 महीने के निचले स्तर पर, फेड की सख्ती और महंगाई की चिंताओं से भारी गिरावट

Summary
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और बढ़ती महंगाई की आशंकाओं के कारण सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जो अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से 27.7% गिरकर 8 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है।
सोने की कीमतें हाल के दिनों में गिरकर $3,942 प्रति औंस के 8 महीने के निचले स्तर पर आ गई हैं, जो महज पांच महीने पहले 30 जनवरी को बने $5,450 के सर्वकालिक उच्च स्तर से 27.7% की बड़ी गिरावट है। यह गिरावट मुख्य रूप से नए फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श के नेतृत्व में सख्त मौद्रिक नीति के संकेतों और ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से उपजी महंगाई की चिंताओं के कारण आई है।
गिरावट के मुख्य कारण
सोने की कीमतों में यह गिरावट अचानक और तेज रही है, अकेले जून महीने में ही -12% की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारक रहे हैं:
- फेड का आक्रामक रुख: फेड के नए चेयरमैन केविन वार्श ने महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों पर एक आक्रामक रुख अपनाया है, जिससे दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ी हैं।
- महंगाई की चिंताएं: ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान ने महंगाई बढ़ने की आशंकाओं को हवा दी है, जिससे फेड पर दरें बढ़ाने का दबाव और बढ़ गया है।
- बाजार की प्रतिक्रिया: 30 जून को सोना $3,942 के निचले स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, 3 जुलाई को अमेरिका के कमजोर नॉन-फार्म पेरोल आंकड़ों के बाद इसमें मामूली उछाल देखा गया, क्योंकि इससे दर वृद्धि की उम्मीदें कुछ कम हुईं।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और बाजार का नजरिया
इस तेज गिरावट के बावजूद, सोने के लिए एक मजबूत संरचनात्मक समर्थन बना हुआ है, जिसका मुख्य स्रोत केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही लगातार खरीदारी है। आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 2024 के बीच केंद्रीय बैंकों ने सालाना लगभग 1,100 टन सोना खरीदा। HSBC का अनुमान है कि यह खरीदारी 2026 में घटकर 680 टन रह सकती है, लेकिन 2027 में फिर से बढ़कर 850 टन तक पहुंच जाएगी। यह मांग सोने की कीमतों के लिए एक आधार प्रदान करती है।
Adप्रमुख वित्तीय संस्थान HSBC ने अपने पूर्वानुमानों में संशोधन किया है, लेकिन वह सोने पर लंबी अवधि के लिए अभी भी सकारात्मक है। HSBC ने 2026 के लिए सोने का लक्ष्य $4,560 प्रति औंस निर्धारित किया है, जो मौजूदा स्तरों से लगभग 13.5% की बढ़त का संकेत देता है। बैंक का मानना है कि राजकोषीय घाटे, भू-राजनीतिक विखंडन और डी-डॉलरीकरण जैसे संरचनात्मक जोखिम लंबी अवधि में सोने का समर्थन करेंगे।
ब्याज दरें और भविष्य की दिशा
ब्याज दरों का बढ़ना सोने के लिए परंपरागत रूप से एक नकारात्मक कारक है। चूंकि सोने पर कोई ब्याज (yield) नहीं मिलता है, इसलिए जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बिना ब्याज वाली संपत्ति जैसे सोने को रखने की अवसर लागत (opportunity cost) बढ़ जाती है। फेड का मौजूदा आक्रामक रुख सोने की कीमतों पर सबसे बड़ा दबाव बना रहा है।
निवेशकों की नजर इस हफ्ते आने वाले फेड की जून बैठक के मिनट्स पर होगी। यदि फेड की ओर से कोई भी नरम संकेत मिलता है, तो यह सोने की रिकवरी को गति दे सकता है। फिलहाल, $3,942 के स्तर से आया उछाल उत्साहजनक है, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए या तो फेड के रुख में नरमी या नए भू-राजनीतिक तनाव की आवश्यकता होगी।