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अमेरिका-ईरान तनाव से वैश्विक बॉन्ड यील्ड्स कई हफ्तों के उच्चतम स्तर पर

Summary
मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने और तेल की कीमतों में उछाल के कारण अमेरिकी ट्रेजरी और यूरोजोन बॉन्ड यील्ड्स गुरुवार को कई हफ्तों के उच्चतम स्तर के करीब बने रहे।
मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव नाटकीय रूप से बढ़ने के बाद, गुरुवार को अमेरिकी ट्रेजरी और यूरोजोन के सरकारी बॉन्ड यील्ड्स अपने कई हफ्तों के उच्चतम स्तर के करीब बने रहे। इस घटनाक्रम ने मुद्रास्फीति की चिंताओं को फिर से हवा दे दी है, जिससे फिक्स्ड-इनकम बाजारों में हाल की शांति भंग हो गई है।
प्रमुख बाजारों में यील्ड्स में उछाल
गुरुवार के कारोबार में, वैश्विक बॉन्ड बाजारों में बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे यील्ड्स (जो बॉन्ड की कीमतों के विपरीत चलती हैं) में तेजी आई।
- अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड, जो वैश्विक उधार लागत के लिए एक बेंचमार्क है, 4.58% के आसपास रही, जो बुधवार को छुए गए 4.60% के स्तर के ठीक नीचे है। यह 21 मई के बाद का उच्चतम स्तर है।
- मौद्रिक नीति अपेक्षाओं के प्रति संवेदनशील, 2-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 4.2% के पास रही, जो लगभग एक महीने के उच्चतम स्तर के करीब है।
- यूरोजोन में, जर्मनी की 10-वर्षीय बंड यील्ड 3.06% के निकट रही, जो मई के अंत के बाद का उच्चतम स्तर है।
तेल की कीमतें और मुद्रास्फीति की चिंता
यील्ड्स में इस अचानक उछाल का मुख्य कारण अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। Investing.com की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के साथ शांति समझौते को "समाप्त" घोषित करने और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी हवाई हमलों के बाद स्थिति बिगड़ गई।
Adहोर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल खपत के लगभग पांचवें हिस्से के लिए एक महत्वपूर्ण पारगमन मार्ग है। आपूर्ति में व्यवधान के खतरे से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल आया। तेल की कीमतों में यह वृद्धि "कॉस्ट-पुश" मुद्रास्फीति (लागत-जनित मुद्रास्फीति) की आशंका पैदा करती है, क्योंकि ऊर्जा लागत विनिर्माण और परिवहन के लिए एक प्राथमिक इनपुट है। बढ़ती मुद्रास्फीति बॉन्ड के निश्चित भुगतानों की क्रय शक्ति को कम कर देती है, जिससे निवेशक उच्च यील्ड की मांग करते हैं।
बाजार का परिप्रेक्ष्य
यह भू-राजनीतिक उथल-पुथल फिक्स्ड-इनकम बाजारों के लिए एक शांत अवधि के बाद आई है। हाल ही में, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के नीति निर्माताओं की संतुलित टिप्पणियों से निवेशक आश्वस्त थे कि मुद्रास्फीति नियंत्रण में आ रही है।
बुधवार को जारी फेडरल रिजर्व की जून की बैठक के मिनट्स ने भी अस्थायी राहत प्रदान की थी, जिसमें दिखाया गया था कि नीति निर्माता भविष्य में दरों में बढ़ोतरी की आवश्यकता पर विभाजित थे। हालांकि, मध्य पूर्व के घटनाक्रमों से उत्पन्न तेल के झटके ने इन भावनाओं पर पानी फेर दिया और निवेशकों का ध्यान पूरी तरह से मुद्रास्फीति के जोखिम पर केंद्रित कर दिया।