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वैश्विक बॉन्ड बाजार में बिकवाली बढ़ी, अमेरिकी 2-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 2025 के बाद के उच्चतम स्तर पर

वैश्विक बॉन्ड बाजार में बिकवाली की लहर मंगलवार को और तेज हो गई, जिससे उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया में सरकारी ऋण पर उधार लेने की लागत कई दशकों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। Investing.com की रिपोर्ट के अनुसार, इस बिकवाली के बीच, अमेरिकी 2-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 2025 के बाद के अपने उच्चतम स्तर को छू गया है, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है।
वैश्विक यील्ड में तेज उछाल
बाजार में जारी उथल-पुथल के बीच, दुनिया भर में बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड यील्ड में तेजी से वृद्धि हुई है। यह प्रवृत्ति निवेशकों द्वारा फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों और मुद्रास्फीति के जोखिमों का फिर से मूल्यांकन करने के कारण प्रेरित है।
- अमेरिका में: मौद्रिक नीति के प्रति संवेदनशील 2-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.354% हो गया, जो 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। वहीं, 10-वर्षीय यील्ड बढ़कर 4.780% और 30-वर्षीय यील्ड 5.273% पर पहुंच गया।
- यूरोप में: जर्मनी का 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 3.352% तक पहुंच गया, जो 2011 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। फ्रांस का 10-वर्षीय यील्ड भी बढ़कर 4.15% हो गया, जो नवंबर 2008 के बाद का उच्चतम स्तर है।
- एशिया में: जापान के बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड (JGB) का यील्ड बढ़कर 3.000% के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया, जो 1996 के अंत के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
बिकवाली के पीछे के कारण
इस ऐतिहासिक बिकवाली के पीछे कई कारक काम कर रहे हैं। मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच सीधे सैन्य संघर्ष ने कच्चे तेल की कीमतों को $90 प्रति बैरल से ऊपर धकेल दिया है, जिससे मुद्रास्फीति के लंबे समय तक उच्च बने रहने की चिंता बढ़ गई है।
Adइसके अलावा, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक आक्रामक मौद्रिक नीति अपना रहे हैं। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श के जैक्सन होल में दिए गए बयानों के बाद बिकवाली तेज हो गई, जिसमें उन्होंने कहा था कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए "अभी और काम करना बाकी है"। बाजार अब सितंबर में फेड द्वारा 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की 60% संभावना मानकर चल रहा है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) और बैंक ऑफ जापान (BoJ) पर भी अपनी नीतियों को और सख्त करने का दबाव है।
बाजार की आगे क्या है नजर
यह बिकवाली एक गहरे संरचनात्मक बदलाव का संकेत देती है, जहां पारंपरिक रूप से भू-राजनीतिक संकटों में "सुरक्षित पनाहगाह" माने जाने वाले सरकारी बॉन्ड अब खुद बिकवाली का शिकार हो रहे हैं। निवेशक अब ऊर्जा की बढ़ती लागत और लगातार उच्च मुद्रास्फीति से प्रेरित लंबी अवधि के स्टैगफ्लेशन (मुद्रास्फीतिजनित मंदी) के जोखिम का मूल्यांकन कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में, निवेशक प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर कड़ी नजर रखेंगे जो केंद्रीय बैंकों के अगले कदमों को प्रभावित कर सकते हैं। इनमें यूरोजोन के अगस्त के CPI आंकड़े, अमेरिका के JOLTS जॉब ओपनिंग डेटा और शुक्रवार को आने वाले गैर-कृषि पेरोल (NFP) के आंकड़े शामिल हैं। ये डेटा फेडरल रिजर्व की 16 सितंबर की बैठक के लिए महत्वपूर्ण होंगे।