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ईरान युद्ध के बाद चीन के तेल आयात में भारी गिरावट, क्या यह रिकवरी करेगा?

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Jul 17, 20263 min read
ईरान युद्ध के बाद चीन के तेल आयात में भारी गिरावट, क्या यह रिकवरी करेगा?

Summary

दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक चीन ने हाल के महीनों में अपने आयात में भारी कटौती की है, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा हो गई है। यह विश्लेषण उन प्रमुख कारकों पर प्रकाश डालता है जो भविष्य में चीन की तेल मांग को आकार देंगे।

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Background

चीन, जो पिछले पांच वर्षों से औसतन 11.5 मिलियन बैरल प्रति दिन (बीपीडी) तेल का आयात कर रहा था, ने अप्रैल के बाद से अपने आयात को घटाकर केवल 8 मिलियन बीपीडी कर दिया है। आयात में इस तेज गिरावट ने वैश्विक तेल की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद की है, लेकिन बाजार पर्यवेक्षक इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि यह मांग कितनी स्थायी है।

ऑक्सफोर्ड इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी स्टडीज में चाइना एनर्जी रिसर्च की प्रमुख मिशल मेडन के अनुसार, "यह एक मिलियन-डॉलर का सवाल है। अनिश्चितता का एक बड़ा स्तर है क्योंकि हम पूरी तरह से नहीं समझ पा रहे हैं कि क्या हुआ है।"

मांग में गिरावट के प्रमुख कारक

चीन की तेल मांग में कमी के पीछे कई संरचनात्मक बदलाव हैं। परिवहन क्षेत्र, जो लगभग आधे कच्चे तेल की खपत करता है, उम्मीद से कम ईंधन पर चलने में सक्षम साबित हुआ है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बिक्री में तेजी आई है।

  • जून में नई कार की बिक्री में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 62% तक पहुंच गई।
  • सरकार ने ट्रकिंग उद्योग के विद्युतीकरण की योजना शुरू की है, जिसका लक्ष्य 2030 तक कुछ व्यस्त मार्गों पर 80% विद्युतीकरण करना है।
  • कंसल्टेंसी रिस्टैड (Rystad) का अनुमान है कि युद्ध के बाद चीन में गैसोलीन और डीजल की खपत क्रमशः 6.6% और 6.9% घट जाएगी, जो उनके पहले के अनुमानों से लगभग दोगुनी है।

औद्योगिक मांग भी चीन की धीमी अर्थव्यवस्था और संपत्ति संकट से प्रभावित हुई है, जिससे निर्माण गतिविधियों में कमी आई है और डीजल की खपत घटी है। पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में कोयला-आधारित विकल्पों से प्रतिस्पर्धा भी तेल के उपयोग को कम कर रही है।

रणनीतिक भंडार और निर्यात की भूमिका

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चीन के आयात के आंकड़ों में उसके रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। पिछले साल भंडार बनाने के अभियान ने आयात को बढ़ाया था, जो अब रुक गया प्रतीत होता है। चीन अपने भंडार के आकार का खुलासा नहीं करता है, जो एक राजकीय रहस्य है।

स्पार्टा कमोडिटीज (Sparta Commodities) की वरिष्ठ विश्लेषक जून गोह का कहना है कि विद्युतीकरण जैसे संरचनात्मक बदलावों से मासिक कच्चा तेल आयात 8 से 9 मिलियन बीपीडी के बीच स्थिर हो सकता है। हालांकि, अगर चीन फिर से भंडार बनाना शुरू करता है, तो यह आंकड़ा 9.5 से 11 मिलियन बीपीडी की सीमा तक बढ़ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि कीमतें $70 प्रति बैरल से नीचे आती हैं तो चीन फिर से भंडारण शुरू कर सकता है।

बाजार के लिए आगे क्या?

चीन की तेल मांग का भविष्य इस बात पर भी निर्भर करेगा कि बीजिंग ईंधन निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को हटाता है या नहीं। यदि अधिशेष गैसोलीन, डीजल और जेट ईंधन को निर्यात करने की अनुमति दी जाती है, तो चीनी रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के लिए अधिक कच्चा तेल आयात करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

चीन के तेल आयात का "नया सामान्य" स्तर इन सभी कारकों - परिवहन का विद्युतीकरण, औद्योगिक गतिविधि, भंडारण रणनीति और निर्यात नीतियों - के जटिल मिश्रण से निर्धारित होगा। यह अनिश्चितता वैश्विक तेल बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है।

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