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ड्यूश बैंक: 2026 में यील्ड ही करेंसी बाजारों की प्रमुख संचालक शक्ति है

Summary
ड्यूश बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच 2026 में विदेशी मुद्रा बाजारों में यील्ड (yield) प्रमुख भूमिका निभा रही है। बैंक का मानना है कि इस साल कैरी ट्रेड का प्रदर्शन अच्छा बना रहेगा।
ड्यूश बैंक एजी (Deutsche Bank AG) ने शुक्रवार को कहा कि एक स्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था के कारण इस साल विदेशी मुद्रा (FX) बाजारों में यील्ड यानी प्रतिफल प्रमुख संचालक बन गया है, जिससे कैरी ट्रेड का प्रदर्शन अच्छा बने रहने की उम्मीद है। बैंक के अनुसार, यह प्रवृत्ति मध्य पूर्व में युद्ध और फेडरल रिजर्व के नेतृत्व में बदलाव जैसी बड़ी घटनाओं के बावजूद कायम है।
यील्ड का बढ़ता प्रभाव
ड्यूश बैंक के करेंसी स्ट्रैटेजी के प्रमुख, जॉर्ज सारावेलोस ने लिखा कि इस साल FX बाजारों में यील्ड सबसे प्रभावशाली कारक रही है। उन्होंने कहा कि जोखिम-समायोजित कैरी (risk-adjusted carry) 2026 में करेंसी की चाल के पीछे सबसे महत्वपूर्ण वजह रही है।
फेडरल रिजर्व के आक्रामक मौद्रिक नीति के रुख (hawkish repricing) को डॉलर के लिए सबसे महत्वपूर्ण सकारात्मक कारक के रूप में देखा गया है। सारावेलोस ने कहा कि डॉलर की चाल में बड़ी तेजी लाने के लिए, बाजार को 75 से 100 आधार अंकों या उससे अधिक की दर वृद्धि की उम्मीद करनी होगी, जो डॉलर को फिर से उच्च-यील्ड वाली मुद्रा का दर्जा दिलाएगा।
प्रमुख मुद्राओं पर दृष्टिकोण
ड्यूश बैंक को यूरो में और गिरावट या डॉलर में व्यापक तेजी की कोई मजबूत वजह नहीं दिखती, क्योंकि यूरोपीय विकास की उम्मीदों में सुधार की संभावना है। दूसरी ओर, जापानी येन अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में अपनी कम यील्ड के कारण दबाव का सामना कर रहा है।
Adबैंक ने कुछ प्रमुख रणनीतियों पर भी प्रकाश डाला:
- जापानी येन (Yen): घरेलू निवेश को बढ़ावा देने के जापान के प्रयास येन को मजबूत कर सकते हैं।
- स्विस फ्रैंक (Swiss Franc): बैंक कैरी ट्रेड को फंड करने के लिए येन के बजाय स्विस फ्रैंक को प्राथमिकता देता है।
निवेशकों के लिए संदर्भ
ड्यूश बैंक ने जापान के 2014 के सरकारी पेंशन निवेश कोष (Government Pension Investment Fund) सुधार का उदाहरण दिया। यह इस बात का एक उदाहरण है कि कैसे घरेलू प्रवाह की उम्मीदों में बदलाव महत्वपूर्ण FX उतार-चढ़ाव पैदा कर सकता है, भले ही नीति के कार्यान्वयन में अधिक समय लगे। यह दिखाता है कि निवेशक भविष्य की नीतियों का अनुमान लगाकर अपनी पोजीशन बनाते हैं, जो करेंसी की कीमतों को प्रभावित करता है।