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एलएमई कॉपर रिकॉर्ड ऊंचाई पर; अमेरिकी टैरिफ और आपूर्ति संबंधी चिंताओं से कीमतों में उछाल

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Sep 9, 20263 min read
एलएमई कॉपर रिकॉर्ड ऊंचाई पर; अमेरिकी टैरिफ और आपूर्ति संबंधी चिंताओं से कीमतों में उछाल

Summary

लंदन मेटल एक्सचेंज पर तांबे की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिसका मुख्य कारण अमेरिकी टैरिफ की अटकलें, आपूर्ति में कमी और AI से प्रेरित दीर्घकालिक मांग की मजबूत संभावनाएं हैं।

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Background

लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर तांबे की कीमतों ने एक नया सर्वकालिक उच्च स्तर छू लिया है, जो कि अमेरिकी आयात शुल्क की उम्मीदों और वैश्विक आपूर्ति में कसाव के कारण प्रेरित है। LME पर तीन महीने का बेंचमार्क कॉपर वायदा 0.8% बढ़कर $14,533 प्रति टन पर पहुंच गया, जिसने जनवरी में बनाए गए पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया।

इस साल तांबे की कीमतों में अब तक 17% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि पिछले 12 महीनों में यह 47% बढ़ी है। यह तेजी अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों कारकों का परिणाम है, जो निवेशकों और बाजारों के लिए एक जटिल परिदृश्य प्रस्तुत कर रहा है।

टैरिफ आर्बिट्राज और इन्वेंट्री का खेल

कीमतों में हालिया उछाल का एक प्रमुख कारण अमेरिका द्वारा परिष्कृत धातु आयात पर टैरिफ बढ़ाने की उम्मीद है। इस प्रत्याशा में, व्यापारियों ने भारी मात्रा में तांबे को अमेरिका भेज दिया है ताकि वहां की ऊंची कीमतों का लाभ उठाया जा सके। इस व्यापारिक गतिविधि ने LME के वैश्विक वेयरहाउस नेटवर्क में स्टॉक को काफी कम कर दिया है, जिससे अधिकांश इन्वेंट्री अमेरिका में केंद्रित हो गई है।

इस स्थिति ने एक स्थानीयकृत कमी पैदा कर दी है, जिससे शॉर्ट-टर्म सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। नतीजतन, हाजिर कीमतें LME के तीन महीने के वायदा से काफी ऊपर कारोबार कर रही हैं, जिसे "स्पॉट प्रीमियम" कहा जाता है, जो तत्काल आपूर्ति की तंगी का संकेत है। चिली के कॉपर थिंक-टैंक Cesco के वरिष्ठ विश्लेषक क्रिस्टियन सिफ्यूएंट्स के अनुसार, "यह वैश्विक मांग की अधिकता के बजाय टैरिफ के कारण धातु के डायवर्जन का मामला है।"

आपूर्ति संकट और चिली की चुनौतियां

मांग की मजबूत तस्वीर के बीच, आपूर्ति पक्ष गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। दुनिया के सबसे बड़े तांबा उत्पादक चिली का अगस्त में तांबा निर्यात राजस्व एक साल के निचले स्तर पर आ गया, जो पिछले साल की तुलना में 3.2% घटकर $4.62 बिलियन रह गया। यह गिरावट कीमतों में 40% की सालाना वृद्धि के बावजूद हुई है।

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चिली के खनन उद्योग को इस साल खराब मौसम, खदान दुर्घटनाओं और परिचालन संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ा है। इन समस्याओं के कारण, वैश्विक तांबा खदान आपूर्ति में 2017 के बाद पहली बार वार्षिक गिरावट देखने को मिल सकती है। मॉर्गन स्टेनली ने भी अपने उत्पादन वृद्धि के अनुमान को घटाकर लगभग सपाट या थोड़ी गिरावट का कर दिया है, जो वैश्विक आपूर्ति की नाजुक स्थिति को दर्शाता है।

AI और ऊर्जा रूपांतरण से दीर्घकालिक मांग

अल्पकालिक कारकों के अलावा, तांबे के लिए दीर्घकालिक मांग की संभावनाएं भी बेहद मजबूत बनी हुई हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटरों का तेजी से विस्तार तांबे की मांग के लिए एक "नए इंजन" के रूप में उभर रहा है।

  • एक अनुमान के अनुसार, 1 गीगावाट के AI डेटा सेंटर में पारंपरिक डेटा सेंटर की तुलना में 2.5 गुना अधिक तांबे की आवश्यकता होती है।
  • 2026 तक, वैश्विक कंप्यूटिंग क्लस्टर के निर्माण से तांबे की मांग में लगभग 475,000 टन की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है।
  • इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और ग्रिड अपग्रेडेशन से भी तांबे की मांग को लगातार बढ़ावा मिल रहा है।

StoneX Financial Inc. के धातु प्रमुख माइकल कुओको के अनुसार, मजबूत मांग वृद्धि और आपूर्ति चुनौतियों का यह संयोजन "भविष्य में बाजार के संतुलन को और अधिक कड़ा करेगा, जिससे कीमतों को समर्थन मिलेगा।" इस माहौल से रियो टिंटो और बीएचपी जैसी बड़ी खनन कंपनियों को काफी फायदा हो रहा है, जिनके तांबा व्यवसायों ने हालिया तिमाहियों में भारी मुनाफा दर्ज किया है।

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