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अमेरिकी डेमोक्रेट्स ने ट्रंप के सऊदी परमाणु समझौते को रोकने के लिए प्रस्ताव पेश किया

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Sep 17, 20262 min read
अमेरिकी डेमोक्रेट्स ने ट्रंप के सऊदी परमाणु समझौते को रोकने के लिए प्रस्ताव पेश किया
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अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के डेमोक्रेट्स ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सऊदी अरब के साथ प्रस्तावित नागरिक परमाणु समझौते को रोकने के लिए एक 'अस्वीकृति प्रस्ताव' (resolution of disapproval) पेश किया है। सांसदों ने इस सौदे में परमाणु अप्रसार (non-proliferation) सुरक्षा उपायों की कमी को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं।

समझौते पर मुख्य आपत्तियां

डेमोक्रेट्स और अप्रसार अधिवक्ताओं की मुख्य आलोचना यह है कि यह परमाणु समझौता सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन या परमाणु कचरे के पुनर्प्रसंस्करण से नहीं रोकता है। ये दोनों प्रक्रियाएं परमाणु हथियार बनाने के संभावित मार्ग हो सकते हैं।

यह संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ 2009 में हुए अमेरिकी समझौते के विपरीत है, जिसमें इन गतिविधियों पर रोक लगाने वाले कड़े उपाय शामिल थे, जिन्हें "गोल्ड स्टैंडर्ड" के रूप में जाना जाता है। चार डेमोक्रेटिक प्रतिनिधियों ने एक बयान में कहा, "एक ऐसा क्षेत्र जो पहले से ही संघर्ष और तनाव की चपेट में है, उसे एक और परमाणु शक्ति की जरूरत नहीं है।"

विधायी प्रक्रिया और बाजार का दृष्टिकोण

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ट्रंप प्रशासन ने अगस्त में इस समझौते को कांग्रेस को समीक्षा के लिए भेजा था, जिससे सांसदों को इस पर विचार करने और अस्वीकृति प्रस्ताव पारित करने के लिए 90 दिनों का समय मिला। परमाणु ऊर्जा अधिनियम (Atomic Energy Act) की धारा 123 के तहत, यदि कांग्रेस इस अवधि में समझौते को नहीं रोकती है, तो यह स्वतः लागू हो जाएगा।

हालांकि, इस प्रस्ताव पर मतदान का समय अनिश्चित है क्योंकि स्पीकर माइक जॉनसन ने सदन को नवंबर के मध्यावधि चुनाव के बाद तक के लिए स्थगित कर दिया है। ऐतिहासिक रूप से, कांग्रेस द्वारा परमाणु सहयोग पर किसी भी अस्वीकृति प्रस्ताव को सफलतापूर्वक पारित नहीं किया गया है।

आर्थिक और व्यावसायिक हित

यह 30-वर्षीय परमाणु सौदा आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें AP1000 रिएक्टरों का निर्माण शामिल है। इस परियोजना का मूल्य अरबों डॉलर है और इससे वेस्टिंगहाउस (Westinghouse) को काफी लाभ होगा, जिसका संयुक्त स्वामित्व कनाडा स्थित कैमेको (Cameco) और ब्रुकफील्ड एसेट मैनेजमेंट (Brookfield Asset Management) के पास है। इस सौदे का भविष्य अब कांग्रेस की कार्रवाई पर निर्भर करेगा, जिस पर निवेशक और संबंधित कंपनियां करीब से नजर रखेंगी।

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