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अमेरिकी ट्रेजरी योजना और नरम प्रतिबंधों से वैश्विक बॉन्ड यील्ड में गिरावट

अमेरिकी ट्रेजरी के एक तकनीकी संकेत और भू-राजनीतिक जोखिमों में कमी के कारण मंगलवार को वैश्विक सरकारी बॉन्ड बाजारों में राहत देखी गई, जिससे उधार लागत में गिरावट आई। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स में आई रिकवरी ने दुनिया भर के बाजारों का नेतृत्व किया, जिससे निवेशकों को हाल की अस्थिरता से कुछ राहत मिली।
यील्ड में गिरावट के प्रमुख कारण
बाजार की धारणा को दो प्रमुख घटनाओं से बल मिला। पहला, ऐसी खबरें हैं कि अमेरिकी ट्रेजरी अपने लगभग $940 बिलियन के ट्रेजरी जनरल अकाउंट (TGA) नकदी शेष का उपयोग बॉन्ड बायबैक कार्यक्रम के लिए कर सकती है। मौजूदा नकदी का उपयोग करके, सरकार को कम नए बॉन्ड जारी करने की आवश्यकता होगी, जिससे बाजार पर आपूर्ति का दबाव कम होगा।
दूसरा, ईरान पर अमेरिका द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंध बाजार की अपेक्षा से कम कठोर निकले। इससे ऊर्जा आपूर्ति में तत्काल बड़े व्यवधान की आशंका कम हो गई, जिसके परिणामस्वरूप ब्रेंट क्रूड वायदा की कीमतें गिरकर लगभग $91.50 प्रति बैरल पर आ गईं। इसने ऊर्जा-जनित मुद्रास्फीति की चिंताओं को भी शांत किया है।
बाजार पर प्रभाव
इस घटनाक्रम के बाद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में सभी अवधियों में गिरावट दर्ज की गई:
Ad- मौद्रिक नीति के प्रति संवेदनशील 2-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड घटकर 4.215% पर आ गई।
- बेंचमार्क 10-वर्षीय यील्ड गिरकर 4.660% हो गई, जो हाल ही में 4.75% के करीब के अपने कई महीनों के उच्च स्तर से नीचे है।
- 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में बड़ी गिरावट आई और यह 5.197% पर आ गई, जो पहले 5.33% से ऊपर के 19-वर्ष के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी।
अमेरिकी बाजार के इस रुख का अनुसरण करते हुए यूरोपीय बॉन्ड यील्ड में भी नरमी आई। जर्मनी की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड गिरकर 3.217% पर आ गई, जबकि फ्रांस की 10-वर्षीय यील्ड 4.117% पर रही।
आगे की दिशा
यील्ड में नरमी के बाद, निवेशकों का ध्यान अब इस सप्ताह होने वाली प्रमुख घटनाओं पर केंद्रित हो गया है। बुधवार को आने वाली Nvidia Corp की दूसरी तिमाही की कमाई रिपोर्ट पर बाजार की पैनी नजर है। AI क्षेत्र में पूंजीगत व्यय के रुझान कॉर्पोरेट क्रेडिट बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, निवेशक शुक्रवार को जैक्सन होल संगोष्ठी में फेडरल रिजर्व के गवर्नर केविन वॉर्श के भाषण का इंतजार कर रहे हैं। उनके भाषण से इस बात के संकेत मिलने की उम्मीद है कि क्या केंद्रीय बैंक लंबी अवधि की उधार लागत को ऊंचा रहने देगा या आने वाले समय में अपनी मौद्रिक नीति में कोई समायोजन करेगा।