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GCAP फाइटर जेट: नए साझेदार के शामिल होने पर भी 2035 की समय-सीमा नहीं बदलेगी

ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) के तहत नए फाइटर जेट को डिजाइन करने वाले ज्वाइंट वेंचर के मुख्य कार्यकारी ने कहा है कि किसी नए देश के शामिल होने पर भी 2035 तक विमान को सेवा में लाने की समय-सीमा में कोई बदलाव नहीं होगा। यह बयान ब्रिटेन, इटली और जापान की इस महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजना में और साझेदारों के जुड़ने की बढ़ती अटकलों के बीच आया है।
समय-सीमा पर दृढ़ता
फ़ार्नबोरो एयरशो में पत्रकारों से बात करते हुए, एजविंग ज्वाइंट वेंचर के सीईओ मार्को ज़ॉफ ने इस बात पर जोर दिया कि तीनों सरकारों की ओर से समय-सीमा का सख्ती से पालन करने का स्पष्ट निर्देश है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हम अंतिम समय-सीमा को खतरे में डाले बिना (नए साझेदार को) समायोजित करने का एक तरीका खोज लेंगे।"
यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब जून में एक प्रतिस्पर्धी फ्रेंको-जर्मन फाइटर कार्यक्रम के ठप हो जाने के बाद यूरोपीय रक्षा गठबंधनों में अनिश्चितता बनी हुई है। इससे निवेशकों और रक्षा क्षेत्र की कंपनियों, जैसे BAE सिस्टम्स और लियोनार्डो, के लिए परियोजना की स्थिरता और प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण संकेत मिलता है।
नए साझेदारों की संभावना
इस कार्यक्रम में नए देशों के शामिल होने की चर्चा तेज हो गई है। रॉयटर्स के एक सूत्र के अनुसार, कनाडा इस कार्यक्रम में एक पर्यवेक्षक (observer) बनने के लिए सहमत हो गया है, हालांकि इसमें कोई वित्तीय प्रतिबद्धता शामिल नहीं है।
Ad- लागत साझाकरण: इटली के रक्षा मंत्री ने पहले कहा था कि एक नया साझेदार लागत साझा करने में मदद करेगा।
- विशेषज्ञता: परियोजना में शामिल कंपनी लियोनार्डो ने जर्मनी को उसकी विशेषज्ञता के कारण एक महत्वपूर्ण संभावित साझेदार बताया है।
- अन्य इच्छुक देश: सऊदी अरब ने भी GCAP में रुचि दिखाई है।
ज़ॉफ ने कहा कि कोई भी नया साझेदार एक "नेट पॉजिटिव" होगा, जो परियोजना के वित्तीय और तकनीकी आधार को और मजबूत कर सकता है।
परियोजना का महत्व और वर्तमान स्थिति
GCAP एक छठी पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर है, जिसे BAE सिस्टम्स, लियोनार्डो और जापान एयरक्राफ्ट इंडस्ट्रियल एनहैंसमेंट के संयुक्त उद्यम एजविंग द्वारा विकसित किया जा रहा है। जापान के लिए 2035 की समय-सीमा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी समय उसके F-2 लड़ाकू विमान रिटायर होने लगेंगे और वह चीन के सैन्य विस्तार को एक सुरक्षा खतरे के रूप में देखता है।
इस परियोजना को ब्रिटेन, इटली और जापान से जुलाई की शुरुआत में £4.6 बिलियन ($6.19 बिलियन) का अनुबंध मिला है। फिलहाल, टीम 2027 के अंत तक कॉन्सेप्ट असेसमेंट चरण को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।