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कच्चे तेल में गिरावट से यूरो यील्ड्स फिसली, ECB की सख्त चेतावनी का असर कम

बुधवार को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट के कारण यूरोजोन के सरकारी बॉन्ड यील्ड्स में कमी आई, जिससे बॉन्ड बाजार को कुछ राहत मिली। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कम होने से तेल की कीमतें गिरीं, जिसका असर यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के सख्त मौद्रिक नीति के संकेतों पर भारी पड़ा।
तेल की कीमतों ने बदला बाजार का रुख
वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 2.5% से अधिक गिरकर लगभग $86 प्रति बैरल पर आ गया। यह गिरावट उन मीडिया रिपोर्टों के बाद आई है जिनमें कहा गया है कि अमेरिका और ईरान एक अंतरिम युद्धविराम समझौते के करीब हैं, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल के निर्बाध पारगमन की गारंटी मिलेगी। इस खबर से मुद्रास्फीति के दबाव का जोखिम कम हो गया, जिससे बॉन्ड यील्ड्स पर दबाव कम हुआ।
इस गिरावट के प्रमुख संकेतक इस प्रकार थे:
- जर्मनी की दो-वर्षीय शैट्ज़ यील्ड फिसलकर 2.781% पर आ गई।
- जर्मनी की 10-वर्षीय बंड यील्ड गिरकर 3.195% पर आ गई, जो 3.20% के मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण स्तर से नीचे है।
ECB का सख्त रुख जारी
Adहालांकि, बॉन्ड बाजार की बढ़त सीमित रही क्योंकि यूरोपीय सेंट्रल बैंक के नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि मौद्रिक नीति लंबे समय तक सख्त रह सकती है। ब्लूमबर्ग न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में, ECB के कार्यकारी बोर्ड की सदस्य इसाबेल श्नाबेल ने चेतावनी दी कि मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उधार लागत को और बढ़ाने की आवश्यकता होगी।
श्नाबेल ने कहा, "मौजूदा नीतिगत दर पर, मुद्रास्फीति के मध्यम अवधि में लक्ष्य पर लौटने की संभावना नहीं है, और इसलिए आगे और सख्ती आवश्यक होगी।" उनके इस बयान ने सितंबर में ECB द्वारा 25-बेसिस-पॉइंट की दर वृद्धि की बाजार की उम्मीदों को पुख्ता किया, जिससे यील्ड्स में और बड़ी गिरावट नहीं आई।
निवेशकों की नजरें जैक्सन होल संगोष्ठी पर
यूरोजोन में बॉन्ड यील्ड्स के हाल के उच्चतम स्तरों से नीचे स्थिर होने के साथ, निवेशक अब इस सप्ताह के अंत में होने वाले अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक नीति घटनाक्रमों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। बाजार की नजरें शुक्रवार को जैक्सन होल इकोनॉमिक पॉलिसी संगोष्ठी में फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श के मुख्य भाषण पर टिकी हैं। वैश्विक बॉन्ड व्यापारी उनके बयानों का विश्लेषण करेंगे ताकि यह पता चल सके कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक अपनी नीति को सख्त बनाए रखेगा या नहीं, क्योंकि इसका असर यूरोपीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।