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टेक कंपनियों के नकदी संकट और तेल की कीमतों में उछाल से बाजार में स्टैगफ्लेशन का डर

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Jul 24, 20262 min read
टेक कंपनियों के नकदी संकट और तेल की कीमतों में उछाल से बाजार में स्टैगफ्लेशन का डर

Summary

अमेरिकी टेक दिग्गज AI पर भारी खर्च के कारण नकदी संकट का सामना कर रहे हैं, जबकि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने ब्रेंट क्रूड को $100 प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया है, जिससे वैश्विक बाजारों में स्टैगफ्लेशन की चिंताएं बढ़ गई हैं।

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Background

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भारी पूंजीगत व्यय के कारण अमेरिकी टेक कंपनियों में नकदी की कमी और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को कई हफ्तों के निचले स्तर पर आ गए, जिसका नेतृत्व टेक-हैवी नैस्डैक ने किया।

टेक सेक्टर में नकदी संकट

इस तिमाही में आय जारी करने वाली पहली बड़ी टेक कंपनी, अल्फाबेट (Alphabet) ने पहली बार नकारात्मक फ्री कैश फ्लो की सूचना दी, जबकि उसने अपने 2026 के पूंजीगत व्यय (capex) अनुमान को $15 बिलियन बढ़ा दिया। इसी तरह, टेस्ला (Tesla) ने भी दो साल से अधिक समय में पहली बार नकारात्मक फ्री कैश फ्लो दर्ज किया है, जो AI और रोबोटिक्स से संबंधित बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर खर्च को दर्शाता है।

रॉयटर्स के एक विश्लेषण के अनुसार, अगर खर्च की मौजूदा गति जारी रहती है, तो चार प्रमुख अमेरिकी हाइपरस्केलर्स - माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट, अमेज़ॅन और मेटा - 2027 तक सामूहिक रूप से अपने फ्री कैश फ्लो से अधिक पूंजीगत व्यय करना शुरू कर सकते हैं। यह AI निवेश की स्थिरता को लेकर निवेशकों के बीच घबराहट पैदा कर रहा है।

ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक उबाल

मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष ने ऊर्जा बाजारों को हिला दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह की लड़ाई के बाद, यमन के हूती मिलिशिया ने बाब अल-मन्देब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सऊदी अरब के जहाजों की नाकाबंदी की घोषणा की है। यह ऊर्जा बाजारों के लिए एक बड़ी समस्या है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने के बाद यह तेल निर्यात का एक प्रमुख वैकल्पिक मार्ग बन गया था।

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इन चिंताओं के कारण, ब्रेंट क्रूड गुरुवार को दो महीनों में पहली बार $100 प्रति बैरल से ऊपर चढ़ गया। हालांकि कीमतें शुक्रवार को इस स्तर से नीचे आ गईं, लेकिन जुलाई में अब तक वे 30% से अधिक बढ़ चुकी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि असली संकट कच्चे तेल में नहीं, बल्कि पेट्रोल और डीजल जैसे रिफाइंड उत्पादों में है, जिनकी रिफाइनिंग क्षमता युद्धों के कारण काफी कम हो गई है।

बाजार पर असर और भविष्य का दृष्टिकोण

इन दोहरे संकटों का असर व्यापक बाजारों पर दिख रहा है। अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है, सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़ रही है, और ट्रेजरी यील्ड पर "टर्म प्रीमियम" भी बढ़ गया है, जो "स्टैगफ्लेशन" (उच्च मुद्रास्फीति और धीमी वृद्धि) के बढ़ते जोखिम का संकेत देता है।

डॉलर की मजबूती का असर मुद्राओं पर भी पड़ रहा है, विशेष रूप से जापानी येन पर, जो इस सप्ताह ग्रीनबैक के मुकाबले 40 साल के निचले स्तर पर आ गया। अगले सप्ताह निवेशकों की नजर फेडरल रिजर्व की बैठक पर होगी, जहां ऊर्जा की कीमतों में उछाल के कारण ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा, दूसरी तिमाही के जीडीपी और जून के कोर पीसीई मुद्रास्फीति के आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।

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