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सोने-चांदी के अनुपात में गिरावट, औद्योगिक मांग के कारण चांदी ने सोने को पछाड़ा

सोने-चांदी के अनुपात (Gold-to-Silver Ratio) में आज 1.1% की गिरावट दर्ज की गई और यह 65.5 पर आ गया, क्योंकि कीमती धातुओं में कई सत्रों की बिकवाली के बाद चांदी ने सोने की तुलना में ज़्यादा मज़बूत रिकवरी दिखाई। यह गिरावट चांदी के बेहतर प्रदर्शन को दर्शाती है, जिसे अमेरिकी डॉलर में मामूली नरमी और इसकी मज़बूत औद्योगिक मांग से समर्थन मिला।
चांदी के बेहतर प्रदर्शन के कारण
चांदी के इस बेहतर प्रदर्शन के पीछे कई प्रमुख कारक हैं। सबसे पहले, अमेरिकी डॉलर में आई नरमी ने भौतिक खरीदारों को चांदी की ओर आकर्षित किया। इसके अलावा, निवेशक शुक्रवार को आने वाले अगस्त के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों से पहले अपनी पोजीशन को समायोजित कर रहे हैं।
चांदी की दोहरी भूमिका भी इसके पक्ष में काम कर रही है। यह न केवल एक कीमती और सुरक्षित निवेश वाली धातु है, बल्कि इसकी लगभग आधी मांग सौर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे औद्योगिक अनुप्रयोगों से भी आती है। यह औद्योगिक मांग सोने के विपरीत चांदी की कीमतों को एक आधार प्रदान करती है, जिससे हालिया बिकवाली के दौरान इसमें सोने जितनी बड़ी गिरावट नहीं आई और आज यह तेज़ी से वापसी कर रही है। UBS द्वारा हाल ही में जारी एक नोट ने भी चांदी के प्रति धारणा को मज़बूत किया है, जिसमें चांदी की कीमतों के लिए अपने दृष्टिकोण को सकारात्मक बताया गया है।
व्यापक बाज़ार का दबाव
Adहालांकि, दोनों कीमती धातुओं के लिए व्यापक आर्थिक माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। पिछले शुक्रवार को उम्मीद से कहीं ज़्यादा मज़बूत आए अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल के आंकड़ों के बाद वैश्विक बॉन्ड बाज़ार में बिकवाली तेज़ हो गई है। इसके चलते, 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर लगभग 4.77% पर पहुंच गई, जो 2008 के बाद का उच्चतम स्तर है।
इन मज़बूत आर्थिक आंकड़ों के कारण बाज़ार अब यह मानकर चल रहा है कि फेडरल रिजर्व द्वारा सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना लगभग 70% है। इस सप्ताह की शुरुआत में फेड गवर्नर माइकल बार के आक्रामक बयानों ने भी इस संभावना को और बल दिया है। इसी दबाव के चलते अमेरिकी शेयर बाज़ारों में भी गिरावट देखी गई, जहाँ S&P 500 में 0.6% और डॉव जोन्स में 0.8% की गिरावट आई।
आगे की दिशा
निवेशकों की नज़र अब शुक्रवार को जारी होने वाले CPI आंकड़ों पर टिकी है, जिसे फेडरल रिजर्व के 15-16 सितंबर के नीतिगत फैसले के लिए एक निर्णायक कारक के रूप में देखा जा रहा है। सोने-चांदी का अनुपात अभी भी अपने 52-सप्ताह के 43.32 से 89.05 के दायरे में है। जब तक मुद्रास्फीति के आंकड़े फेड के अगले कदम को स्पष्ट नहीं कर देते, तब तक व्यापारी बाज़ार में सतर्क रुख अपना सकते हैं।