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ईरान तनाव से चांदी की कीमतों में गिरावट, खनन शेयरों पर भारी दबाव

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Jul 16, 20262 min read
ईरान तनाव से चांदी की कीमतों में गिरावट, खनन शेयरों पर भारी दबाव

Summary

अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं के कारण चांदी की हाजिर कीमतों में भारी गिरावट आई, जिससे चांदी खनन कंपनियों के शेयरों में तेज बिकवाली हुई।

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Background

अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं के कारण गुरुवार को चांदी की हाजिर कीमतों में भारी गिरावट आई। इस गिरावट का सीधा असर चांदी खनन करने वाली कंपनियों के शेयरों पर पड़ा, जिनमें तेज बिकवाली का दबाव देखा गया।

कीमतों में गिरावट और शेयरों पर असर

Investing.com के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को स्पॉट सिल्वर (हाजिर चांदी) की कीमत 1.7% गिरकर $56.82 प्रति औंस पर आ गई। इस गिरावट के चलते, प्रमुख खनन कंपनियों जैसे हेक्ला माइनिंग (Hecla Mining), कोएर माइनिंग (Coeur Mining), और सिल्वरकॉर्प मेटल्स (Silvercorp Metals) के शेयरों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई।

खनन कंपनियों के शेयरों में यह गिरावट अक्सर धातु की कीमत में गिरावट से अधिक होती है, जो उनके परिचालन उत्तोलन (operating leverage) को दर्शाता है। इसी संदर्भ में, स्कोशियाबैंक (Scotiabank) ने हेक्ला के लिए अपने मूल्य लक्ष्य को $25 से घटाकर $21 कर दिया है, जिसका कारण चांदी पर बना लगातार दबाव है।

व्यापक बाजार का संदर्भ

यह गिरावट चांदी के लिए एक बड़े बिकवाली के दौर का हिस्सा है। यह कीमती धातु अब अपने जनवरी 2026 के $121.62 प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर से लगभग 52% नीचे आ चुकी है। सोना-चांदी का अनुपात (gold-silver ratio) भी बढ़कर लगभग 69:1 हो गया है, जो ऐतिहासिक रूप से सोने की तुलना में चांदी के कमजोर प्रदर्शन का संकेत देता है।

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यह कमजोरी केवल अमेरिकी बाजारों तक ही सीमित नहीं है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, लंदन के FTSE 100 कीमती धातु खनिक उप-सूचकांक में भी बुधवार को 2.7% की गिरावट आई थी। व्यापक अमेरिकी धातु और खनन क्षेत्र, जिसे SPDR S&P मेटल्स एंड माइनिंग ETF (XME) द्वारा ट्रैक किया जाता है, में भी हाल के हफ्तों में लगभग 25% की गिरावट आई है।

भू-राजनीतिक तनाव और फेड की भूमिका

इस बिकवाली का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष है, जिसने तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है और मुद्रास्फीति की चिंताओं को हवा दी है। बढ़ती मुद्रास्फीति से यह उम्मीद बढ़ गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है, ताकि मूल्य वृद्धि को नियंत्रित किया जा सके।

CME FedWatch टूल के आंकड़ों के अनुसार, व्यापारी सितंबर में फेड द्वारा दर वृद्धि की लगभग 51% संभावना मान रहे हैं। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से चांदी जैसी गैर-लाभकारी संपत्तियों (non-yielding assets) को रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है, जिससे वे निवेशकों के लिए कम आकर्षक हो जाती हैं। निवेशकों की नजर अब डलास फेड के अध्यक्ष लोरी लोगान और फेड के उपाध्यक्ष फिलिप जेफरसन के आगामी भाषणों पर होगी, जिनसे भविष्य में दरों की दिशा के बारे में संकेत मिल सकते हैं।

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