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जेफरीज का अनुमान: मैक्रो चुनौतियों के कारण सीमित दायरे में रहेगा भारतीय बाजार

निवेश फर्म जेफरीज ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिकी यील्ड और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जैसी मैक्रोइकोनॉमिक बाधाओं के कारण भारतीय शेयर बाजार निकट भविष्य में एक सीमित दायरे में रह सकते हैं। इन चुनौतियों के बावजूद, फर्म ने लंबी अवधि के लिए स्मॉल और मिड-कैप (SMID) ग्रोथ शेयरों पर अपना भरोसा कायम रखा है।
प्रमुख मैक्रोइकोनॉमिक चुनौतियां
जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, भारत कई चुनौतियों का सामना कर रहा है जो बाजार की तेजी पर लगाम लगा सकती हैं।
- अमेरिकी यील्ड्स में बढ़ोतरी: अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड्स भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए फंडिंग का दबाव पैदा करती हैं, जिससे विदेशी निवेश का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
- तेल की ऊंची कीमतें: तेल की कीमतों का लगातार ऊंचे स्तर पर बने रहना भारतीय बाजार के लिए अनुकूल नहीं है, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है।
- सकारात्मक पहलू: रिपोर्ट में एकमात्र सकारात्मक कारक डॉलर में संभावित गिरावट (debasement) को बताया गया है।
स्मॉल और मिड-कैप पर नजर
मैक्रो चुनौतियों के बावजूद, स्मॉल और मिड-कैप सेगमेंट ने इस साल बेहतर प्रदर्शन किया है। MSCI इंडिया स्मॉल-कैप इंडेक्स ने इस साल स्टैंडर्ड इंडेक्स की तुलना में लगभग 14% का बेहतर प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन शेयरों में 20% से अधिक की ईपीएस (प्रति शेयर आय) वृद्धि देखी जा रही है और वे लार्ज-कैप के 1.4 गुना की तुलना में 1.1 गुना के पीई/जी (PE/G) अनुपात पर कारोबार कर रहे हैं।
Adजेफरीज ने कहा कि मौजूदा हालात क्वालिटी और डिफेंसिव शेयरों के पक्ष में हैं, लेकिन स्मॉल और मिड-कैप के लिए लंबी अवधि के ग्रोथ ड्राइवर अभी भी मजबूत हैं। फर्म ने बताया कि इस साल उसकी SMID, मल्टीबैगर्स और कंपाउंडर्स रणनीतियों ने 12% से 15% तक का रिटर्न दिया है।
मूल्यांकन और आय पर चिंताएं
जेफरीज ने अपने उभरते बाजार (EM) कंट्री मॉडल में भारत को 'अंडरवेट' रेटिंग दी है, जिसका मुख्य कारण आय और मूल्यांकन को लेकर चिंताएं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 20 गुना के पीई (मूल्य-से-आय) अनुपात और 13% की ईपीएस सीएजीआर (चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर) के साथ, भारत पीई/जी के आधार पर महंगा दिखता है।
फर्म का मानना है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए MSCI इंडिया की 12% की अनुमानित ईपीएस वृद्धि हासिल होने की संभावना है, लेकिन अगले साल की वृद्धि बाजार की उम्मीदों से कम रह सकती है। जेफरीज ने स्पष्ट किया है कि जब तक किसी बड़े आर्थिक चक्र में बदलाव का सबूत नहीं मिलता, तब तक वह वैल्यू या क्वालिटी शेयरों की तरफ रोटेशन के बजाय ग्रोथ स्टाइल को प्राथमिकता देना जारी रखेगा।