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सऊदी टैंकर पर हूती हमले के दावे के बाद खाड़ी के शिपिंग मार्गों पर यातायात में भारी गिरावट

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Aug 6, 20262 min read
सऊदी टैंकर पर हूती हमले के दावे के बाद खाड़ी के शिपिंग मार्गों पर यातायात में भारी गिरावट

Summary

यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी तेल टैंकरों पर हमला करने का दावा किए जाने के बाद, होर्मुज और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख समुद्री मार्गों पर जहाजों की आवाजाही में भारी कमी दर्ज की गई है।

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Background

यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों के सऊदी तेल टैंकर पर मिसाइल हमले के दावे के बाद बुधवार को खाड़ी के दो प्रमुख समुद्री चोकपॉइंट्स पर शिपिंग यातायात में भारी गिरावट देखी गई। शिपिंग डेटा से पता चलता है कि इन महत्वपूर्ण जलमार्गों से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में एक ही दिन में भारी कमी आई है।

हमले का दावा और शिपिंग पर असर

हूती विद्रोहियों ने बुधवार को दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब के लाल सागर बंदरगाह शहर यानबु के तट पर एक सऊदी तेल टैंकर पर मिसाइल हमला किया है। उन्होंने अदन की खाड़ी में एक अन्य सऊदी तेल टैंकर पर भी मिसाइल हमले का दावा किया। हालांकि, इन दोनों घटनाओं पर सऊदी अरब की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है।

इन दावों के बाद, शिपिंग डेटा विश्लेषण फर्म केप्लर (Kpler) के आंकड़ों के अनुसार, प्रमुख जलमार्गों पर यातायात लगभग ठप हो गया।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य: बुधवार को इस मार्ग से केवल दो जहाजों ने पार किया, जबकि एक दिन पहले यह संख्या आठ थी।
  • बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य: बुधवार को यहां से केवल एक जहाज गुजरा, जबकि पिछले दिन 20 जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई थी।
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भू-राजनीतिक तनाव और बाजार के लिए मायने

यह घटनाक्रम क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को उजागर करता है। हूती विद्रोहियों ने पिछले महीने लाल सागर में सऊदी अरब पर नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर दी थी, जिसे उन्होंने यमन पर सऊदी घेराबंदी की प्रतिक्रिया बताया था, हालांकि रियाद ने इस आरोप से इनकार किया है।

होर्मुज और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा और वस्तु व्यापार के लिए महत्वपूर्ण धमनियाँ हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने से पहले, होर्मुज जलडमरूमध्य से आम तौर पर प्रतिदिन 130 से 140 जहाज गुजरते थे। इन मार्गों पर यातायात में किसी भी तरह की बड़ी रुकावट वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर सकती है और तेल की कीमतों में अस्थिरता पैदा कर सकती है, जिसका असर निवेशकों और बाजारों पर पड़ सकता है।

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