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गूगल ने अल्फाजीनोम एटलस लॉन्च किया, जो DNA उत्परिवर्तनों के प्रभावों का व्यापक नक्शा है

गूगल (Google) ने अल्फाजीनोम एटलस (AlphaGenome Atlas) को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है, जो एक अभूतपूर्व डेटाबेस है। यह मानव जीनोम में हर संभव एकल-न्यूक्लियोटाइड भिन्नता के प्रभाव की भविष्यवाणी करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
प्रमुख विकास
गूगल ने अपने अल्फाजीनोम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल का उपयोग करके जीन विनियमन पर 9 अरब संभावित एकल-बेस आनुवंशिक परिवर्तनों के प्रभाव की गणना की है। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप 1 पेटाबाइट का एक विशाल डेटासेट तैयार हुआ है।
यह पहल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि मानव जीनोम का लगभग 98% हिस्सा नॉन-कोडिंग है, जिसके बारे में वैज्ञानिक समझ अब तक सीमित रही है। अल्फाजीनोम एटलस का उद्देश्य इसी ज्ञान की कमी को दूर करना है, यह समझाते हुए कि जीन उत्परिवर्तन कोडिंग और नॉन-कोडिंग दोनों क्षेत्रों में आणविक प्रक्रियाओं को कैसे प्रभावित करते हैं।
अनुसंधान और प्रभाव
एटलस एक "अल्फाजीनोम वैरिएंट इम्पैक्ट स्कोर" प्रस्तुत करता है, जो शोधकर्ताओं को विशाल डेटा के माध्यम से छानबीन किए बिना सबसे महत्वपूर्ण आनुवंशिक परिवर्तनों की पहचान करने में मदद करता है। यह स्कोर कोडिंग और नॉन-कोडिंग दोनों क्षेत्रों के पूर्वानुमानों को एक व्यापक मीट्रिक में एकीकृत करता है।
Adइस उपकरण के व्यावहारिक अनुप्रयोग पहले ही देखे जा चुके हैं:
- ब्रॉड इंस्टीट्यूट (Broad Institute) में, शोधकर्ताओं ने दुर्लभ बीमारियों के अध्ययन में वेरिएंट को प्राथमिकता देने के लिए स्कोर का उपयोग किया, जिससे DNM1 जीन में एक महत्वपूर्ण उत्परिवर्तन की सफलतापूर्वक पहचान हुई।
- एक अन्य अध्ययन में, यूके बायोबैंक (UK Biobank) के 54,000 से अधिक प्रतिभागियों के डेटा पर एटलस को लागू करने से 22% अधिक नॉन-कोडिंग आनुवंशिक संबंध और बॉडी मास इंडेक्स (BMI) से जुड़े 19 नए आनुवंशिक क्षेत्र पाए गए।
व्यापक पहुंच और भविष्य
गूगल ने अल्फाजीनोम एटलस को एक वेब पोर्टल के माध्यम से जनता के लिए उपलब्ध कराया है, जिसके उपयोग के लिए प्रोग्रामिंग कौशल की आवश्यकता नहीं है। कंपनी के अनुसार, यह उपकरण जीनोमिक्स खोज और वैज्ञानिक अनुसंधान में तेजी लाने की उसकी प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भविष्य में स्वास्थ्य सेवा और जैव प्रौद्योगिकी के लिए गहरे प्रभाव डाल सकता है।