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UBS की चेतावनी: सितंबर में दर वृद्धि से सोने में आ सकती है अल्पावधि बिकवाली

Summary
UBS के अनुसार, यदि फेडरल रिजर्व इस महीने ब्याज दरें बढ़ाता है तो सोने की कीमतों में अस्थायी गिरावट आ सकती है, हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट सीमित होगी और व्यापक सुधार की राह से नहीं हटेगी।
UBS ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस महीने ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, तो सोने की कीमतों में एक अल्पावधि गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि, वित्तीय सेवा कंपनी का मानना है कि किसी भी गिरावट का दायरा सीमित रहने की उम्मीद है।
दर वृद्धि का सोने पर असर
UBS की रणनीतिकार जोनी टेवेस के अनुसार, हालिया रोजगार रिपोर्ट के बाद सोने की कीमतों में दिखी मजबूती का यह मतलब नहीं है कि ब्याज दरों का अब कोई महत्व नहीं रह गया है। बल्कि, बाजार पहले ही दर वृद्धि की उम्मीदों को काफी हद तक पचा चुका है। टेवेस ने लिखा, "हम उम्मीद करते हैं कि सितंबर में दर वृद्धि से तत्काल गिरावट आएगी, लेकिन यह व्यापक सुधार को पटरी से नहीं उतारेगी।"
उन्होंने कहा कि यदि फेडरल रिजर्व दरें बढ़ाता है, तो वास्तविक दरों और डॉलर की प्रतिक्रिया के कारण सोने में शुरुआती चाल नीचे की ओर जाने की संभावना है। हालांकि, भारत में आने वाली मौसमी भौतिक मांग और निचले स्तरों पर संस्थागत व आधिकारिक क्षेत्र के निवेशकों (जैसे केंद्रीय बैंकों) द्वारा की जाने वाली खरीदारी गिरावट को सीमित करने में मदद करेगी।
तेजी और मंदी के दोतरफा जोखिम
UBS का विश्लेषण बताता है कि अगर फेडरल रिजर्व दरें नहीं बढ़ाता है, तो सोने में "मजबूत तेजी की प्रतिक्रिया" देखने को मिल सकती है। ऐसी स्थिति में निवेशक सोने की ओर आकर्षित होंगे, खासकर यदि इस फैसले से फेड की स्वतंत्रता पर सवाल उठते हैं।
Adटेवेस के अनुसार, जोखिम दोतरफा हैं लेकिन उनका झुकाव तेजी की ओर अधिक है। उन्होंने लिखा, "सोना अभी भी फेड की ओर से किसी भी आक्रामक रुख के प्रति संवेदनशील हो सकता है, लेकिन यह सकारात्मक उत्प्रेरकों के प्रति तेजी से अधिक संवेदनशील होता दिख रहा है।"
सोने को इन कारकों से मिल रहा समर्थन
सोने की कीमतों के लिए कई सहायक कारक मौजूद हैं जो साल के अंत तक जोखिम-इनाम अनुपात को सकारात्मक बनाए हुए हैं। UBS ने इन प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
- केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीद जारी है। चीन ने अगस्त में लगभग 20 टन सोना जोड़ा, जिससे इस साल उसकी कुल खरीद लगभग 80 टन हो गई है, जो 2023 के अंत के बाद सबसे मजबूत आंकड़ा है।
- ETF में निवेश: गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में धीरे-धीरे निवेश फिर से बढ़ रहा है।
- चीन में मांग: चीन में सोने के कारोबार की गतिविधियों में सुधार हो रहा है।
- भारत में मौसमी मांग: भारत में त्योहारी और शादी-ब्याह के सीजन की मांग जल्द ही शुरू होने वाली है।