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वैश्विक बॉन्ड बिकवाली में राहत, यूरोपीय और ऑस्ट्रेलियाई यील्ड शिखर से नीचे

एक सप्ताह की भारी बिकवाली के बाद गुरुवार को वैश्विक सरकारी बॉन्ड बाजार में गिरावट का दौर थम गया, जिससे यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में बेंचमार्क उधारी लागत अपने कई वर्षों के उच्चतम स्तर से नीचे आ गई। फिक्स्ड-इनकम निवेशकों को अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की नरम टिप्पणियों और उम्मीद से कमजोर अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़ों से कुछ राहत मिली।
प्रमुख बाजारों में यील्ड का हाल
यूरोप में, जर्मनी की नीति-संवेदनशील दो-वर्षीय शैट्ज़ यील्ड सात सत्रों में पहली बार गिरकर 2.966% पर आ गई। इसी तरह, बेंचमार्क 10-वर्षीय जर्मन बंड यील्ड भी सात सत्रों में पहली बार घटकर 3.362% पर आ गई, जो इस सप्ताह की शुरुआत में 2011 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी।
हालांकि, फ्रांस के सरकारी बॉन्ड पर दबाव बना रहा। राजकोषीय घाटे की चिंताओं के कारण फ्रांस की 10-वर्षीय OAT यील्ड लगातार सातवें सत्र में बढ़कर 4.237% हो गई, जो 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद के उच्चतम स्तर के करीब है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में, ऑस्ट्रेलिया की बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड बुधवार के 15-साल के उच्च स्तर 5.205% से घटकर 5.157% पर आ गई।
बिकवाली थमने के कारण
बॉन्ड की कीमतों में यह अस्थायी स्थिरता मुख्य रूप से दो कारकों से प्रेरित थी। पहला, न्यूयॉर्क फेड के अध्यक्ष जॉन विलियम्स की टिप्पणी, जिसमें उन्होंने ब्याज दरों पर निर्णय लेने से पहले और अधिक आर्थिक आंकड़ों की समीक्षा करने की आवश्यकता का संकेत दिया। दूसरा, ADP के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में अमेरिकी निजी पेरोल में केवल 38,000 नौकरियों की वृद्धि हुई, जो आम सहमति के पूर्वानुमान से काफी कम थी।
Adइन घटनाक्रमों ने वैश्विक मौद्रिक नीति में आक्रामक सख्ती की उम्मीदों को कुछ हद तक कम कर दिया है, जिससे बॉन्ड बाजारों को थोड़ी राहत मिली है। अब निवेशकों की नजर शुक्रवार को आने वाली महत्वपूर्ण अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल (NFP) रिपोर्ट पर है।
अंतर्निहित जोखिम बने हुए हैं
गुरुवार की स्थिरता के बावजूद, बाजार रणनीतिकार चेतावनी देते हैं कि वैश्विक ऋण बाजारों पर अंतर्निहित दबाव बना हुआ है। फारस की खाड़ी में भू-राजनीतिक तनाव से ऊर्जा की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे मुद्रास्फीति का जोखिम बढ़ रहा है। यह यूरोपीय सेंट्रल बैंक जैसे केंद्रीय बैंकों के लिए मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के रास्ते को जटिल बनाता है।
इसके साथ ही, प्रमुख सरकारें अपने राजकोषीय खर्च को पूरा करने के लिए रिकॉर्ड मात्रा में कर्ज जारी कर रही हैं, जिससे बॉन्ड बाजार में आपूर्ति का दबाव बढ़ रहा है। यह स्थिति बॉन्ड यील्ड पर ऊपर की ओर दबाव बनाए रख सकती है, जिससे बाजार में एक स्थायी तेजी की राह मुश्किल हो सकती है।