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अमेरिकी अदालत ने मिशिगन कोयला संयंत्र को खुला रखने के सरकारी आदेश को खारिज किया

एक अमेरिकी संघीय अपील अदालत ने शुक्रवार को ट्रम्प प्रशासन के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसने मिशिगन के एक कोयला संयंत्र को उसकी नियोजित सेवानिवृत्ति के बाद भी चालू रखने के लिए मजबूर किया था। यह निर्णय प्रशासन के कोयला-आधारित बिजली उत्पादन को बनाए रखने के प्रयासों के लिए एक झटका है।
अदालत का फैसला
डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया सर्किट के लिए अमेरिकी अपील न्यायालय के तीन-न्यायाधीशों के पैनल ने सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया। अदालती दस्तावेजों के अनुसार, पैनल ने पाया कि ऊर्जा विभाग (DOE) ने संघीय कानून के एक आपातकालीन प्रावधान के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है, जिसका उपयोग बहुत कम किया जाता है।
मिशिगन ने इस आदेश को तब चुनौती दी थी जब 2025 में DOE ने संयंत्र को उसके नियोजित बंद से ठीक पहले ऑनलाइन बने रहने का निर्देश दिया था। पर्यावरण समूह अर्थजस्टिस के एक वकील ने कहा कि DOE को अपनी आपातकालीन शक्तियों का उपयोग केवल वास्तविक आपात स्थितियों में ही करना चाहिए।
वित्तीय और बाजार प्रभाव
यह फैसला जे.एच. कैंपबेल जनरेटिंग प्लांट से संबंधित है, जो कंज्यूमर्स एनर्जी के स्वामित्व में है। इस संयंत्र को 2025 में बंद किया जाना था क्योंकि यह अब आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं था। मिशिगन के अटॉर्नी जनरल के कार्यालय के अनुसार, इस आदेश के तहत संयंत्र को चालू रखने की लागत मई 2025 से जून 2026 तक यूटिलिटी कंपनी को $295 मिलियन पड़ी।
Adकंज्यूमर्स एनर्जी के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी फैसले की समीक्षा कर रही है, लेकिन इस बीच वह DOE के मौजूदा 90-दिवसीय आदेश का पालन करना जारी रखेगी जो संयंत्र को चालू रखता है। यह निर्णय ऊर्जा क्षेत्र के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पुराने और महंगे बिजली संयंत्रों को कृत्रिम रूप से चालू रखने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की सीमाओं को दर्शाता है।
व्यापक संदर्भ
यह मामला डेटा सेंटरों के विस्तार से जुड़ी बिजली की बढ़ती मांग के बीच कोयला आधारित उत्पादन को संरक्षित करने के प्रशासन के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। 2025 से, ट्रम्प प्रशासन ने संघीय विद्युत अधिनियम (Federal Power Act) के तहत अपनी आपातकालीन शक्तियों का उपयोग मिशिगन, इंडियाना, वाशिंगटन राज्य और कोलोराडो सहित कई पुराने बिजली संयंत्रों को चालू रखने के लिए किया है।
कोयला आधारित बिजली जलवायु परिवर्तन में योगदान देने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है। यह अदालती फैसला इस बात पर प्रकाश डालता है कि बाजार की ताकतों और नियामक निरीक्षण के बीच राष्ट्रीय ऊर्जा नीति को लेकर तनाव बना हुआ है।