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अल्फाबेट के नतीजों पर जेमिनी में देरी और भारी खर्च का साया

गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट बुधवार को अपनी दूसरी तिमाही के नतीजे जारी करने वाली है, लेकिन इसके प्रमुख AI मॉडल जेमिनी के लॉन्च में देरी और भारी खर्च से जुड़ी चिंताओं ने निवेशकों की उम्मीदों पर असर डाला है। अप्रैल में क्लाउड बिक्री में शानदार प्रदर्शन के बावजूद कंपनी के शेयर दबाव में हैं।
जेमिनी में देरी और खर्च पर चिंता
निवेशकों की मुख्य चिंता कंपनी के अगले फ्लैगशिप मॉडल, जेमिनी 3.5 प्रो के लॉन्च में हुई देरी है, जिसे जून में लॉन्च किया जाना था। यह मॉडल AI कोडिंग टूल्स और एजेंटिक AI जैसे आकर्षक बाजारों में प्रतिस्पर्धियों से मुकाबला करने के लिए महत्वपूर्ण है।
यह देरी ऐसे समय में हुई है जब चीनी ओपन-सोर्स मॉडल अमेरिकी कंपनियों को चुनौती दे रहे हैं और AI पर होने वाले भारी खर्च को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं। अल्फाबेट ने अप्रैल में 2026 के लिए अपने पूंजीगत व्यय का अनुमान बढ़ाकर $180 बिलियन से $190 बिलियन कर दिया था, जिससे निवेशकों में इस भारी निवेश के रिटर्न को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बाजार का प्रदर्शन और विश्लेषकों की उम्मीदें
इन चिंताओं के कारण, अप्रैल के अंत से अल्फाबेट के शेयरों में लगभग 9% की गिरावट आई है, और इस अवधि में यह अन्य "मैग्निफिसेंट सेवन" शेयरों से पीछे रहा है। हालांकि, साल-दर-साल आधार पर, शेयर अभी भी लगभग 13% ऊपर है।
AdLSEG के आंकड़ों के अनुसार, विश्लेषकों को उम्मीद है कि अल्फाबेट की दूसरी तिमाही का राजस्व 21.3% बढ़कर $116.93 बिलियन हो जाएगा।
- क्लाउड बिक्री: लगभग 64% की मजबूत वृद्धि का अनुमान है, जो मेटा और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों के साथ गूगल के कस्टम AI चिप्स के लिए हुए बड़े सौदों से प्रेरित है।
- विज्ञापन राजस्व: 13.7% की धीमी गति से बढ़ने का अनुमान है।
कंपनी की ताकत और आगे की राह
विश्लेषकों का मानना है कि AI की दौड़ में गूगल का सबसे बड़ा फायदा उसके AI मॉडल, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और कस्टम सिलिकॉन के अलावा उसका विशाल उपभोक्ता वितरण नेटवर्क है। एप्टस कैपिटल एडवाइजर्स के पोर्टफोलियो मैनेजर डेव वैगनर के अनुसार, "गूगल की रणनीति पूरी तरह से इकोसिस्टम पर आधारित है।"
हालांकि, जेमिनी में देरी और प्रमुख कर्मचारियों का कंपनी छोड़ना निकट भविष्य में चुनौतियां पेश कर सकता है। निवेशक कंपनी के नतीजों और भविष्य के लिए प्रबंधन की कमेंट्री पर करीब से नजर रखेंगे ताकि AI और खर्च की रणनीति पर स्पष्टता मिल सके।