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Volkswagen में ऐतिहासिक छंटनी पर समझौता, प्रबंधन की 'आपातकालीन बैठक' की धमकी आई काम

Volkswagen के सुपरवाइजरी बोर्ड ने कंपनी के इतिहास के सबसे बड़े पुनर्गठन समझौते को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है, जिससे बड़े पैमाने पर नौकरियों में कटौती का रास्ता साफ हो गया है। यह फैसला प्रबंधन द्वारा एक 'आपातकालीन शेयरधारक बैठक' (EGM) बुलाने की धमकी के बाद आया, जिसने शक्तिशाली श्रमिक संघों और प्रमुख शेयरधारक लोअर सैक्सनी को एक समझौते पर आने के लिए मजबूर कर दिया।
क्या हुआ?
यूरोप की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Volkswagen (VW) घटते मार्जिन, चीनी प्रतिद्वंद्वियों से प्रतिस्पर्धा और अमेरिकी टैरिफ जैसी समस्याओं से जूझ रही है। लागत कम करने के लिए, सीईओ ओलिवर ब्लूम ने 100,000 कर्मचारियों तक को प्रभावित कर सकने वाली नौकरियों में कटौती की एक ऐतिहासिक योजना का प्रस्ताव रखा था।
हालांकि, इस योजना का सुपरवाइजरी बोर्ड में कड़ा विरोध हुआ, जहाँ श्रमिक संघों और कंपनी के दूसरे सबसे बड़े शेयरधारक, लोअर सैक्सनी राज्य का बहुमत है। सूत्रों के अनुसार, इस गतिरोध को तोड़ने के लिए, प्रबंधन बोर्ड ने सुपरवाइजरी बोर्ड को दरकिनार करने के लिए EGM बुलाने की धमकी दी, जिसे एक "परमाणु विकल्प" के रूप में देखा गया।
समझौते की मुख्य बातें
इस धमकी ने एक समझौते के लिए आधार तैयार किया। बुधवार को वोल्फ्सबर्ग में VW के मुख्यालय में एक तनावपूर्ण बैठक हुई, जिसमें सीईओ ओलिवर ब्लूम, सुपरवाइजरी बोर्ड के चेयरमैन हैंस डाइटर पोएत्श और लोअर सैक्सनी के प्रमुख ओलाफ लाइज सहित प्रमुख हितधारक शामिल हुए।
Adसमझौते के तहत:
- सुपरवाइजरी बोर्ड ने नौकरियों में कटौती की योजना को मंजूरी दे दी।
- बदले में, प्रबंधन ने यात्री कार और कंपोनेंट डिवीजनों के लिए अलग कानूनी इकाइयाँ बनाने की अपनी योजना को स्थगित कर दिया। इस कदम से लोअर सैक्सनी और यूनियनों की शक्ति कम हो जाती।
बाज़ार पर असर और आगे की राह
इस समझौते की खबर से निवेशकों ने राहत की सांस ली, जिन्हें एक लंबे और हानिकारक टकराव का डर था। गुरुवार को सौदे की घोषणा के बाद Volkswagen के शेयरों में तेजी देखी गई, जो पिछले पाँच वर्षों में अपने मूल्य का एक चौथाई खो चुके थे।
हालांकि, यह समझौता अंतिम समाधान नहीं है। नौकरियों में कटौती के सटीक विवरण पर अभी भी यूनियनों के साथ बातचीत होनी बाकी है, जिससे भविष्य में जर्मनी भर के VW संयंत्रों में हड़तालें हो सकती हैं। इसके अलावा, चीन से प्रतिस्पर्धा और टैरिफ जैसी बाहरी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। कंपनी को अब एम्डेन, ज़्विकाउ, नेकारसुलम और हनोवर में अपने चार कारखानों के भविष्य के लिए भी ठोस योजनाएँ पेश करनी होंगी।