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अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से बाजार को मिली थोड़ी राहत, लेकिन फेड की राह अनिश्चित

Summary
जुलाई के अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति के आंकड़े उम्मीद के मुताबिक आने से बाजारों ने राहत की सांस ली है, जिससे सितंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम हो गई है। हालांकि, आगामी उत्पादक मूल्य डेटा और बढ़ती तेल की कीमतें भविष्य की अनिश्चितता को बढ़ा रही हैं।
अमेरिका के जुलाई महीने के उपभोक्ता मुद्रास्फीति के आंकड़े उम्मीद के अनुरूप आने से वैश्विक बाजारों को मामूली राहत मिली है, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा अगली बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका कुछ कम हुई है। हालांकि, यह राहत संक्षिप्त हो सकती है क्योंकि आगे आने वाले अन्य आर्थिक संकेतक और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें केंद्रीय बैंक के फैसलों पर असर डाल सकती हैं।
महंगाई के आंकड़ों से मिली मामूली राहत
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई के लिए वार्षिक हेडलाइन और कोर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की दरें उम्मीद के मुताबिक थोड़ी कम हुईं। इन आंकड़ों के बाद, ब्याज दर बाजारों ने सितंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्धि की संभावना को 50% से थोड़ा नीचे कर दिया है, जिससे एक ठहराव की उम्मीद बढ़ी है।
हालांकि, इस राहत का असर बॉन्ड बाजार पर मिला-जुला रहा। अल्पावधि के ट्रेजरी बॉन्ड्स को कुछ सहारा मिला, लेकिन सरकार को हाल ही में हुई 10-वर्षीय बॉन्ड की नीलामी में लगभग 20 वर्षों में उच्चतम यील्ड पर कर्ज बेचना पड़ा।
आगे की राह अभी भी चुनौतीपूर्ण
बाजारों की यह राहत अस्थायी साबित हो सकती है क्योंकि मुद्रास्फीति की पूरी तस्वीर अभी सामने आनी बाकी है। आज जारी होने वाले उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) के आंकड़ों पर निवेशकों की कड़ी नजर रहेगी, क्योंकि इसमें फेड के पसंदीदा महंगाई मापक, व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) गेज के महत्वपूर्ण घटक शामिल होते हैं।
Adविश्लेषकों का अनुमान है कि जुलाई में कोर और हेडलाइन PCE मुद्रास्फीति दोनों 3% से ऊपर बनी रह सकती है। इसके अलावा, जुलाई के बाद से तेल की कीमतों में आई तेजी अगस्त के मुद्रास्फीति के आंकड़ों को प्रभावित कर सकती है, जिसे फेडरल रिजर्व सितंबर की बैठक से पहले देखेगा। ब्रेंट क्रूड फिलहाल $90 प्रति बैरल के नीचे कारोबार कर रहा है।
वैश्विक बाजारों का हाल
अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भी महंगाई एक चिंता का विषय बनी हुई है। जापान में, जुलाई में वार्षिक थोक मुद्रास्फीति दर ऊर्जा की ऊंची कीमतों के कारण 7% से ऊपर बनी रही, जिससे बैंक ऑफ जापान के लिए नीतिगत निर्णय लेना जटिल हो गया है।
वहीं दूसरी ओर, ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था ने 2026 की दूसरी तिमाही में 0.4% की मजबूत वृद्धि दर्ज की, और यह लगातार दूसरी तिमाही है जब यह सबसे तेजी से बढ़ने वाली G7 अर्थव्यवस्था रही है। इस बीच, वॉल स्ट्रीट में AI-संबंधित शेयरों जैसे कि CoreWeave और Super Micro में उछाल के बाद प्रमुख सूचकांक अपने रिकॉर्ड स्तर के करीब बने हुए हैं।