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मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी, अमेरिकी डॉलर मजबूत

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण मंगलवार को अमेरिकी डॉलर में मजबूती आई, क्योंकि निवेशकों ने सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ा दी। यह बदलाव तब आया जब वाशिंगटन ने खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर हुए नए हमलों के जवाब में ईरान के एक महत्वपूर्ण लाइसेंस को रद्द कर दिया।
मध्य पूर्व में बढ़ा टकराव
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने ईरानी मूल के कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन, वितरण और बिक्री को अधिकृत करने वाले जनरल लाइसेंस को रद्द कर दिया। रॉयटर्स और एक्सियोस ने एक अमेरिकी अधिकारी का हवाला देते हुए कहा कि यह कदम जहाजों पर हुए नए हमलों की प्रतिक्रिया थी।
इससे पहले, यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास पिछले 24 घंटों में तीन अलग-अलग तेल टैंकरों पर हमलों की रिपोर्ट दी थी। इन घटनाओं ने क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है, जिससे तेल की कीमतों में 5% से अधिक की बढ़ोतरी हुई और निवेशकों ने सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख किया।
बाजार पर असर और अन्य मुद्राएं
भू-राजनीतिक चिंताओं ने अमेरिकी डॉलर को एक सुरक्षित संपत्ति के रूप में आकर्षक बना दिया। डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक को मापता है, 0.2% बढ़कर 101.10 पर कारोबार कर रहा था। जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक अक्सर अमेरिकी डॉलर जैसी स्थिर मानी जाने वाली संपत्तियों में अपना पैसा लगाते हैं।
Adदूसरी ओर, अन्य प्रमुख मुद्राओं पर दबाव देखा गया:
- यूरो: जर्मनी के बेहतर विनिर्माण आंकड़ों के बावजूद, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के एक वरिष्ठ अधिकारी के सतर्क दृष्टिकोण के कारण यूरो 0.3% गिरकर $1.1411 पर आ गया।
- जापानी येन: डॉलर के मुकाबले येन 162.10 के स्तर पर लगभग अपरिवर्तित रहा, जो 40 साल के निचले स्तर के करीब है। स्टर्लिंग के मुकाबले येन 2007 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप की आशंका बढ़ गई है।
निवेशकों की नजर फेडरल रिजर्व पर
इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम से पहले, बाजार का ध्यान मुख्य रूप से मौद्रिक नीति पर था। अब निवेशक बुधवार को जारी होने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जून की बैठक के मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं। इन मिनट्स से नीति निर्माताओं की सोच और इस साल संभावित ब्याज दरों में बढ़ोतरी को लेकर और संकेत मिल सकते हैं। पहले के नरम रोजगार आंकड़ों ने फेड को ब्याज दरें स्थिर रखने की गुंजाइश दी थी, लेकिन मिनट्स से भविष्य की दिशा का पता चलेगा।