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आईएमओ ने देशों से होरमुज़ जलडमरूमध्य पर ईरानी नियंत्रण के प्रयासों को खारिज करने का आग्रह किया

संयुक्त राष्ट्र की शिपिंग एजेंसी की गवर्निंग काउंसिल ने शुक्रवार को एक निर्णय में कहा कि देशों को होरमुज़ जलडमरूमध्य पर संप्रभुता थोपने के ईरान के प्रयासों को अस्वीकार कर देना चाहिए। काउंसिल ने जलमार्ग के माध्यम से यातायात को नियंत्रित करने के लिए एक निकाय बनाने के तेहरान के "एकतरफा फैसले" का भी विरोध किया।
आईएमओ काउंसिल का निर्णय
लंदन स्थित अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की 40-सदस्यीय गवर्निंग काउंसिल ने अपने एक गैर-बाध्यकारी निर्णय में ईरान के फैसले की "कड़ी निंदा" की। ईरान ने हाल ही में एक "फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण" की स्थापना की थी, जिसने जून में एक एडवाइजरी जारी कर कहा था कि बिना वैध परमिट के किसी भी जहाज को जलमार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं है।
काउंसिल ने सदस्य देशों से आग्रह किया है कि वे:
- होरमुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान के संप्रभुता के दावे को मान्यता न दें।
- जलडमरूमध्य में और उसके आसपास तीसरे राज्यों के समुद्री क्षेत्रों पर ईरान के अधिकार क्षेत्र के दावों को स्वीकार न करें।
- अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन और पारगमन के अधिकार में हस्तक्षेप करने, बाधा डालने या बंद करने के उद्देश्य से किसी भी ईरानी निर्णय को मान्यता न दें।
ईरान का पक्ष और भू-राजनीतिक तनाव
Adईरान, जो काउंसिल का सदस्य नहीं है, ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को "चयनात्मक, राजनीति से प्रेरित और कानूनी रूप से निराधार" बताते हुए खारिज कर दिया। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वह UNCLOS (समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन) का पक्षकार नहीं है और इसलिए संधि-आधारित व्यवस्था से "बाध्य नहीं" है।
तेहरान ने कहा कि उसके द्वारा लागू किए गए उपाय समुद्री सुरक्षा को बनाए रखने, आक्रामकता के कृत्यों को समर्थन रोकने और अपनी संप्रभुता और सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए हैं। यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें जहाजों पर हमले भी शामिल हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
बाजार के लिए निहितार्थ
होरमुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है, और इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है। यह विवाद इस महत्वपूर्ण शिपिंग लेन में भू-राजनीतिक जोखिम को बढ़ाता है। आपूर्ति में व्यवधान की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता आ सकती है, जिससे शिपिंग लागत और वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है। ऊर्जा और शिपिंग क्षेत्रों के निवेशकों को इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।