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मध्य पूर्व में तनाव से तेल की कीमतों में उछाल, FTSE 100 में गिरावट

Summary
मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंताओं के कारण सोमवार को तेल की कीमतों में भारी उछाल आया, जिससे ब्रिटेन के FTSE 100 सूचकांक ने अपनी शुरुआती बढ़त खो दी।
सोमवार को ब्रिटेन के शेयर बाज़ार में शुरुआती बढ़त के बाद गिरावट देखी गई। मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के बयान के बाद तेल की कीमतों में आए उछाल ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया।
बाज़ार का प्रदर्शन
Investing.com के आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन का प्रमुख सूचकांक FTSE 100 0.10% की गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इसके विपरीत, अन्य यूरोपीय बाज़ारों में मिला-जुला रुख रहा, जहाँ जर्मनी का DAX 0.10% और फ्रांस का CAC 40 0.11% की मामूली बढ़त दर्ज करने में कामयाब रहे।
इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सबसे बड़ा असर कमोडिटी बाज़ार पर दिखा:
- ब्रेंट क्रूड की कीमतें 3.6% बढ़कर $78.72 प्रति बैरल हो गईं।
- WTI क्रूड 3.4% की तेजी के साथ $73.87 प्रति बैरल पर पहुंच गया।
- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले स्टर्लिंग में नरमी आई और GBP/USD की जोड़ी 0.10% गिरकर 1.3394 पर आ गई।
तनाव के पीछे के कारण
Adबाज़ार की यह प्रतिक्रिया मध्य पूर्व में हुई हालिया घटनाओं की एक श्रृंखला के बाद आई है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ नए हमले किए हैं। इसके जवाब में, ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर "चेतावनी शॉट" फायर करने और बहरीन तथा ओमान में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमलों का दावा करने की खबरें हैं।
इस तनाव को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस बयान ने और हवा दी, जिसमें उन्होंने फॉक्स न्यूज को बताया कि अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य का सीधा नियंत्रण लेना चाहिए। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण धमनी है, और यहाँ किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है
मध्य पूर्व में बढ़ती अनिश्चितता ने बाज़ार में जोखिम से बचाव (risk aversion) की भावना को बढ़ा दिया है, जिससे निवेशक इक्विटी जैसे जोखिम भरे निवेशों से दूर हो रहे हैं। तेल की कीमतों में उछाल ऊर्जा कंपनियों के शेयरों के लिए सकारात्मक है, लेकिन यह अन्य क्षेत्रों, जैसे कि एयरलाइंस और विनिर्माण, के लिए लागत बढ़ाता है, जिससे उनके मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक बाज़ारों में अस्थिरता (volatility) बनी रह सकती है। निवेशक आगे की घटनाओं और प्रमुख वैश्विक शक्तियों की प्रतिक्रियाओं पर करीब से नजर रखेंगे।