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अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से पहले चांदी में उछाल, निवेशक सतर्क

स्पॉट सिल्वर (XAG/USD) की कीमतों में आज के सत्र में तेजी से वापसी हुई, और यह 1.3% बढ़कर $64.396 प्रति ट्रॉय औंस पर कारोबार कर रही है। यह उछाल तीन सप्ताह से अधिक के सबसे निचले स्तर $62.9965 से आया है, क्योंकि व्यापारियों ने अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के महत्वपूर्ण आंकड़ों के जारी होने से पहले गिरावट पर खरीदारी की।
यह CPI रिपोर्ट फेडरल रिजर्व की 15-16 सितंबर की नीतिगत बैठक से पहले महंगाई का आखिरी प्रमुख संकेतक होगी।
आज की तेजी के प्रमुख कारण
चांदी में आज का उछाल कई कारकों का मिला-जुला परिणाम है। गुरुवार को अमेरिकी उत्पादक कीमतों में अगस्त में तेजी आने के बाद चांदी में भारी गिरावट आई थी। इसके बाद निवेशकों ने आज निचले स्तरों पर खरीदारी का मौका देखा, जिससे कीमतों को सहारा मिला।
विश्लेषकों के अनुसार, चांदी को $63.00 के आसपास एक तकनीकी समर्थन मिला, जहाँ से यह वापस उछली है। हालांकि, उनका मानना है कि आगे की तेजी सीमित हो सकती है क्योंकि निवेशक अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं और तकनीकी सेटअप अभी भी मंदी का संकेत दे रहा है।
फेडरल रिजर्व और भू-राजनीतिक तनाव का असर
Adगुरुवार को जारी हुए आंकड़ों से पता चला था कि ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा लागत बढ़ने से उत्पादक कीमतों में तेजी आई है। इसके बाद, बाजारों ने अगले सप्ताह फेड द्वारा 25-बेसिस-पॉइंट की दर वृद्धि की संभावना को 71% तक बढ़ा दिया था। चूंकि चांदी एक बिना-यील्ड वाली संपत्ति है, इसलिए बढ़ती ब्याज दरें आमतौर पर इसकी कीमतों पर दबाव डालती हैं।
इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिका-ईरान तनाव के कारण सुरक्षित-निवेश की मांग बनी हुई है, जिससे चांदी को कुछ समर्थन मिल रहा है। हालांकि, तेहरान से सुरक्षित शिपिंग मार्ग के बारे में मिले-जुले संकेतों ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
आपूर्ति की चिंता और भविष्य का दृष्टिकोण
लंबी अवधि में, चांदी को आपूर्ति की कमी से संरचनात्मक समर्थन मिल रहा है। सिल्वर इंस्टीट्यूट ने पुष्टि की है कि 2025 तक लगातार पांचवें वर्ष आपूर्ति घाटा रहेगा, और 2026 के लिए छठे घाटे का अनुमान है।
निकट भविष्य में, कीमती धातुओं की दिशा मुख्य रूप से अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, नौकरियों के डेटा और फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक के नतीजों पर निर्भर करेगी। ये कारक डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों की दिशा तय करेंगे, जिसका सीधा असर चांदी की कीमतों पर पड़ेगा।