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अगस्त में सोने की तेजी का कारण निवेश मांग, अमेरिकी बॉन्ड बायबैक नहीं: WGC

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Sep 4, 20262 min read
अगस्त में सोने की तेजी का कारण निवेश मांग, अमेरिकी बॉन्ड बायबैक नहीं: WGC

Summary

विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) के अनुसार, अगस्त में सोने की कीमतों में उछाल मुख्य रूप से ETF और वायदा में मजबूत निवेश प्रवाह के कारण था, न कि अमेरिकी ट्रेजरी के बॉन्ड पुनर्खरीद कार्यक्रम के कारण।

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Background

विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) के एक वरिष्ठ विश्लेषक ने स्पष्ट किया है कि अगस्त में सोने की कीमतों में आई उल्लेखनीय तेजी का मुख्य कारण मजबूत निवेश मांग थी, न कि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा बॉन्ड पुनर्खरीद का विस्तार करने का निर्णय। यह निर्णय केवल पहले से चल रही तेजी को गति देने वाला एक कारक था।

निवेश प्रवाह ने बढ़ाई चमक

अगस्त में, हाजिर सोने की कीमतें कई महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। WGC के यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका क्षेत्र के वरिष्ठ विश्लेषक, क्रिशन गोपाल के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी की घोषणा महीने के अंत में आई और इसने केवल उस तेजी को बढ़ाया जो पहले से ही मौजूद थी।

गोपाल ने बताया कि जुलाई से ही सोने में निवेश की मांग में स्पष्ट रूप से मजबूती आ रही थी।

  • जुलाई में, वैश्विक गोल्ड-समर्थित एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETFs) में $3 बिलियन का शुद्ध प्रवाह दर्ज किया गया, जिसने पिछले दो महीनों की निकासी के रुख को पलट दिया।
  • अगस्त में यह प्रवाह और बढ़कर $17 बिलियन हो गया, जो मजबूत निवेशक रुचि को दर्शाता है।
  • इसके अतिरिक्त, चीन और भारत जैसे प्रमुख बाजारों में भी सोने की निवेश मांग में सुधार के संकेत मिले हैं।

गोपाल ने जोर देकर कहा, "सोने की इस हालिया तेजी को मुख्य रूप से निवेश मांग ने प्रेरित किया है, विशेष रूप से वायदा पोजीशनिंग में वृद्धि और गोल्ड ETF में प्रवाह के माध्यम से, न कि खुदरा भौतिक मांग में अचानक वृद्धि के कारण।"

केंद्रीय बैंकों की भूमिका

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विश्लेषक ने केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीद को बाजार के लिए एक "महत्वपूर्ण बुनियादी स्तंभ" के रूप में वर्णित किया, लेकिन इसे हालिया तेजी का "प्रत्यक्ष उत्प्रेरक" नहीं माना। उनके अनुसार, यह विश्वास करना मुश्किल है कि केंद्रीय बैंक की खरीदारी कई हफ्तों तक चलने वाली रैली का सीधा कारण थी।

यह उम्मीद की जाती है कि इस वर्ष आधिकारिक क्षेत्र की सोने की खरीद मजबूत बनी रहेगी, हालांकि यह 2025 के स्तर से कम हो सकती है। केंद्रीय बैंकों की खरीद बाजार को एक आधार प्रदान करती है, लेकिन दैनिक मूल्य उतार-चढ़ाव पर इसका सीधा प्रभाव कम होता है।

भविष्य का दृष्टिकोण और प्रमुख जोखिम

आगे देखते हुए, गोपाल का मानना है कि सोने के लिए समग्र वातावरण अनुकूल बना हुआ है, लेकिन अनिश्चितता और अस्थिरता बनी रह सकती है। उन्होंने निवेशकों के लिए कई प्रमुख कारकों पर प्रकाश डाला:

  • नकारात्मक जोखिम: लंबी अवधि के वास्तविक प्रतिफल में वृद्धि, डॉलर में मजबूती, या अमेरिकी फेडरल रिजर्व का उम्मीद से अधिक आक्रामक मौद्रिक रुख सोने की कीमतों के लिए अल्पकालिक बाधाएं पैदा कर सकता है।
  • सकारात्मक कारक: इसके विपरीत, डॉलर में और कमजोरी, वास्तविक प्रतिफल में लगातार गिरावट, ETF में निरंतर प्रवाह, या बढ़ते राजकोषीय और भू-राजनीतिक जोखिम सोने के लिए सहायक साबित होंगे।
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