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अमेरिका में 12 साल से कम उम्र के बच्चों में वजन घटाने वाली दवाओं का इस्तेमाल 300 गुना बढ़ा: अध्ययन

अमेरिका में 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए GLP-1 श्रेणी की वजन घटाने वाली दवाओं के नुस्खों में 2019 के बाद से 300-गुना से अधिक की आश्चर्यजनक वृद्धि देखी गई है। 'पीडियाट्रिक्स' जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, यह प्रवृत्ति डॉक्टरों द्वारा छोटे और मोटापे से ग्रस्त रोगियों के लिए नए और प्रभावी उपचार खोजने की बढ़ती कोशिश को दर्शाती है।
अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष
यह अध्ययन 8 से 11 वर्ष की आयु के 3.5 मिलियन से अधिक मोटापे से ग्रस्त बच्चों (जिन्हें मधुमेह नहीं था) के डेटा पर आधारित था। शोधकर्ताओं ने पाया कि GLP-1 दवाओं के नुस्खों की दर 2019 में 0.03% से बढ़कर इस साल जून तक 9.3% हो गई।
अध्ययन अवधि के दौरान कुल 20,282 बच्चों को GLP-1 दवाएं दी गईं। प्रमुख निष्कर्षों में शामिल हैं:
- इन दवाओं को प्राप्त करने वाले 94% बच्चे गंभीर मोटापे से ग्रस्त थे।
- लगभग 65% बच्चों में मोटापे से संबंधित कम से कम एक अन्य स्वास्थ्य समस्या थी, जैसे उच्च कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप या स्लीप एपनिया।
- सबसे अधिक निर्धारित की जाने वाली दवा नोवो नॉर्डिस्क (Novo Nordisk) की वेगोवी (Wegovy) थी, जिसके बाद नोवो की ही सैक्सेंडा (Saxenda) और एली लिली (Eli Lilly) की ज़ेपबाउंड (Zepbound) का स्थान रहा।
बाजार और नियामक संदर्भ
Adहालांकि इन दवाओं को 12 साल से कम उम्र के बच्चों में उपयोग के लिए आधिकारिक तौर पर मंजूरी नहीं दी गई है, लेकिन नैदानिक दिशानिर्देश कुछ मामलों में आठ साल तक के बच्चों में मोटापे के इलाज के लिए इनके उपयोग की अनुमति देते हैं। यह दवा निर्माताओं नोवो नॉर्डिस्क और एली लिली के लिए एक नए और तेजी से बढ़ते बाजार का द्वार खोलता है।
NYU लैंगोन हेल्थ के प्रमुख अन्वेषक और मोटापा चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. बबाक ओरंडी ने कहा कि हालांकि GLP-1 उपचार प्राप्त करने वाले 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की कुल संख्या अभी भी कम है, लेकिन अध्ययन से पता चलता है कि इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने इन दवाओं की दीर्घकालिक सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर निगरानी की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
पहुंच और भविष्य की चिंताएं
अध्ययन ने इन दवाओं तक पहुंच में एक महत्वपूर्ण असमानता को भी उजागर किया है। आंकड़ों के अनुसार, उच्च आय वाले समुदायों में रहने वाले बच्चों को ये दवाएं निर्धारित किए जाने की संभावना 55% अधिक थी। यह इस बात का संकेत है कि लागत और स्वास्थ्य बीमा कवरेज पहुंच में बाधा बन सकते हैं।
अध्ययन के सह-लेखक एलन मैसी ने कहा कि चिकित्सकों और स्वास्थ्य नीति निर्माताओं की यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है कि ये मूल्यवान उपचार केवल उन लोगों तक सीमित न रहें जिनके पास बेहतर स्वास्थ्य बीमा और बाल चिकित्सा क्लीनिकों तक पहुंच है। शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए एपिक कॉसमॉस (Epic Cosmos) नामक एक राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड डेटाबेस का उपयोग किया।