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अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद वैश्विक बॉन्ड यील्ड स्थिर, हालिया तेज उछाल थमा

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Jul 12, 20262 min read
अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद वैश्विक बॉन्ड यील्ड स्थिर, हालिया तेज उछाल थमा

Summary

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव से प्रेरित बिकवाली के बाद शुक्रवार को वैश्विक बॉन्ड यील्ड में स्थिरता आई, जिससे निवेशकों को थोड़ी राहत मिली। ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि से मुद्रास्फीति की नई चिंताओं ने बाजार की धारणा को बदल दिया है।

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Background

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष के कारण पिछले कुछ सत्रों में बॉन्ड बाजार में भारी बिकवाली देखी गई, लेकिन शुक्रवार को अमेरिकी ट्रेजरी और यूरोजोन यील्ड्स में स्थिरता आई। इस ठहराव से पहले, ऊर्जा-जनित मुद्रास्फीति की आशंकाओं के कारण यील्ड्स में महीनों का सबसे बड़ा उछाल दर्ज किया गया था।

बॉन्ड बाजार की मौजूदा स्थिति

प्रमुख बॉन्ड बाजारों में यील्ड्स अपने हाल के उच्च स्तर के पास बनी हुई हैं, जो बाजार में जारी तनाव को दर्शाता है।

  • बेंचमार्क 10-वर्षीया अमेरिकी ट्रेजरी नोट पर यील्ड थोड़ी गिरकर 4.54% पर आ गई, जो अभी भी दो महीने के उच्चतम स्तर के करीब है।
  • 2-वर्षीया अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, जो फेडरल रिजर्व की ब्याज दर की उम्मीदों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, 4.18% पर स्थिर रही।
  • यूरोजोन के लिए बेंचमार्क, जर्मनी की 10-वर्षीया बंड यील्ड, मामूली गिरावट के साथ 3.033% पर थी, जो सात सप्ताह के उच्च स्तर के पास है।

बुधवार और गुरुवार को, वाशिंगटन और तेहरान के बीच भारी सैन्य हमलों के आदान-प्रदान के बाद इन बेंचमार्क यील्ड्स में हाल के महीनों की सबसे बड़ी दो-दिवसीय वृद्धि देखी गई थी।

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भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रास्फीति की चिंताएं

अमेरिका-ईरान के बीच अचानक बढ़े तनाव ने 17 जून के नाजुक संघर्ष विराम को खतरे में डाल दिया है, जिससे फिक्स्ड-इनकम बाजारों में हलचल मच गई है। इस संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से समुद्री पारगमन गंभीर रूप से बाधित हुआ है, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतें वापस $78 प्रति बैरल की ओर बढ़ गई हैं।

तेल की कीमतों में इस उछाल ने निकट-अवधि के मुद्रास्फीति अनुमानों को पूरी तरह से बदल दिया है। इस सप्ताह के संघर्षों से पहले, बॉन्ड बाजार इस धारणा पर आगे बढ़ रहे थे कि नरम मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंकों को एक तटस्थ रुख अपनाने की अनुमति देगी। अब उन धारणाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे निवेशक भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चित हैं।

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