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फेडरल रिजर्व के अस्पष्ट संकेतों से बॉन्ड यील्ड 19 साल के उच्चतम स्तर पर, टेक शेयरों में सुधार

Summary
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर अस्पष्ट संचार ने 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड को 19 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया, जबकि मध्य पूर्व में तनाव के कारण तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया।
इस सप्ताह बाजार की दिशा तीन प्रमुख कारकों से तय हुई: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श के अस्पष्ट बयानों के कारण बॉन्ड बाजार में बिकवाली, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से तेल की कीमतों में अस्थिरता, और प्रमुख तकनीकी कंपनियों के मिले-जुले नतीजों के बीच AI शेयरों में चिंता। इन घटनाओं ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता को बढ़ा दिया है।
फेड के रुख से बॉन्ड बाजार में उथल-पुथल
इस सप्ताह फेडरल रिजर्व की बैठक सबसे महत्वपूर्ण घटना रही। फेड ने ब्याज दरों को स्थिर रखा, लेकिन तीन सदस्यों की असहमति ने नीतिगत अनिश्चितता का संकेत दिया। हालांकि, बाजार पर सबसे बड़ा असर चेयरमैन केविन वार्श की प्रेस कॉन्फ्रेंस का हुआ, जिनके जटिल बयानों ने निवेशकों को भ्रमित कर दिया।
इस भ्रम के परिणामस्वरूप, लंबी अवधि के बॉन्ड में भारी बिकवाली हुई। 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.2% पर पहुंच गई, जो 19 वर्षों में इसका उच्चतम स्तर है। वहीं, छोटी अवधि की दरें गिर गईं, जिससे यील्ड कर्व और स्टीप हो गया। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि निवेशक लंबी अवधि में मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने की फेड की क्षमता पर विश्वास खो रहे हैं।
टेक शेयरों में रिकवरी और तेल में अस्थिरता
तकनीकी क्षेत्र में, निवेशकों की ऊंची उम्मीदों के कारण शुरुआत में निराशा देखी गई। दक्षिण कोरिया की चिप निर्माता कंपनी SK Hynix का मुनाफा छह गुना बढ़ने के बावजूद इसके शेयर लगभग 10% गिर गए। हालांकि, बाद में Microsoft और Amazon के मजबूत क्लाउड राजस्व के आंकड़ों ने माहौल बदल दिया, जिससे वॉल स्ट्रीट और एशियाई बाजारों में तेजी आई। दक्षिण कोरिया का KOSPI सूचकांक लगभग 18% उछल गया।
Adवहीं, मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव आया। सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी हमलों में ठहराव के कारण ब्रेंट क्रूड $84 प्रति बैरल तक गिर गया था। लेकिन ईरान द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर हमले के बाद बुधवार को कीमतों में लगभग 8% की तेजी आई, हालांकि शुक्रवार तक यह $90 प्रति बैरल से नीचे आ गया।
अन्य केंद्रीय बैंक और आगे का दृष्टिकोण
दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने भी इस सप्ताह अपनी नीतियां तय कीं। बैंक ऑफ इंग्लैंड ने दरों को स्थिर रखा, जबकि बैंक ऑफ जापान ने भी यथास्थिति बनाए रखी, लेकिन भविष्य में बढ़ोतरी का संकेत दिया। इस बीच, येन में सरकारी हस्तक्षेप की आशंका से अस्थिरता बनी रही।
अगले सप्ताह, निवेशक अमेरिकी रोजगार के आंकड़ों और प्रमुख कंपनियों के नतीजों पर नजर रखेंगे। हालांकि गर्मियों के कारण बाजार में कारोबार कम हो सकता है, लेकिन मध्य पूर्व की घटनाओं पर नजर बनी रहेगी, जो ऊर्जा बाजारों और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।