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जापान की नई पेंशन फंड नीति से येन में उछाल, डॉलर मामूली साप्ताहिक बढ़त की ओर

शुक्रवार को जापानी येन में एक महत्वपूर्ण नीतिगत घोषणा के बाद जोरदार तेजी देखी गई, जबकि अमेरिकी डॉलर सप्ताह के अंत में मामूली बढ़त की ओर अग्रसर है। निवेशक मुद्रास्फीति के बदलते आंकड़ों और मौद्रिक नीति पर इसके प्रभाव का आकलन कर रहे हैं।
जापान की पेंशन फंड योजना से येन को मिला सहारा
येन में यह मजबूती जापान की नई वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा (Satsuki Katayama) की उस घोषणा के बाद आई है, जिसमें कहा गया है कि टोक्यो अपने विशाल गवर्नमेंट पेंशन इन्वेस्टमेंट फंड (GPIF) को घरेलू संपत्तियों में अधिक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु संरचनात्मक नीतिगत उपायों पर विचार कर रहा है।
GPIF दुनिया के सबसे बड़े पेंशन फंडों में से एक है, जो 293.6 ट्रिलियन येन ($1.81 ट्रिलियन) की संपत्ति का प्रबंधन करता है। इस फंड के विशाल विदेशी निवेश को घरेलू बाजार में वापस लाने की संभावना ने येन के लिए एक मजबूत संरचनात्मक मांग पैदा कर दी है।
इस खबर का असर बॉन्ड बाजार पर भी दिखा, जहां जापानी 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट आई। यह कदम येन को सहारा देने के लिए जापान की रणनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जो पहले प्रत्यक्ष बाजार हस्तक्षेप और मौखिक चेतावनियों पर निर्भर थी, जो कि अमेरिका और जापान के बीच ब्याज दरों के बड़े अंतर के कारण काफी हद तक अप्रभावी साबित हुई हैं।
डॉलर एक सीमित दायरे में, नजरें महंगाई के आंकड़ों पर
Adइस बीच, अमेरिकी डॉलर एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक को मापता है, 0.1% बढ़कर 100.96 पर था और सप्ताह के लिए भी लगभग 0.1% की बढ़त दर्ज करने की राह पर है।
डॉलर की चाल पर कई कारकों का मिला-जुला असर दिख रहा है, जिसमें फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव शामिल हैं। इस सप्ताह जारी फेड की जून बैठक के मिनट्स से पता चला कि नीति निर्माता ब्याज दरों के भविष्य को लेकर समान रूप से बंटे हुए थे।
बाजार का आउटलुक और निवेशक
अब निवेशकों का ध्यान अगले सप्ताह आने वाले अमेरिका के महत्वपूर्ण मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर केंद्रित है। जून महीने के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मंगलवार को और उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) बुधवार को जारी किया जाएगा।
बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि मई में मुद्रास्फीति अपने चरम पर पहुंच गई होगी, और अब इसमें नरमी आ सकती है। येन के लिए, GPIF की नीति में बदलाव एक दीर्घकालिक सकारात्मक कारक हो सकता है, जबकि डॉलर की दिशा काफी हद तक आगामी सीपीआई रिपोर्ट पर निर्भर करेगी, जो फेडरल रिजर्व के अगले कदम का संकेत दे सकती है।