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ब्रिटेन के उद्योग जगत ने चांसलर हीली से ऊर्जा लागत कम करने के लिए लेवी हटाने का आग्रह किया

ब्रिटेन के प्रमुख व्यावसायिक समूहों के एक व्यापक गठबंधन ने सरकार से बिजली बिलों पर लगने वाली लेवी को हटाने का आग्रह किया है, ताकि बढ़ती ऊर्जा लागत से उद्योगों को राहत मिल सके। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह मांग रसायन और इस्पात जैसे ऊर्जा-गहन क्षेत्रों पर पड़ रहे वित्तीय दबाव को उजागर करती है।
मुख्य मांगें और तर्क
ब्लूमबर्ग द्वारा प्राप्त एक पत्र में, औद्योगिक निकायों ने चांसलर जॉन हीली से आग्रह किया कि बिजली बिलों से लेवी को हटाकर सामान्य सरकारी खर्च में स्थानांतरित किया जाए। ये शुल्क वर्तमान में नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं और अन्य सामाजिक व ऊर्जा नीतियों के वित्तपोषण में मदद करते हैं।
उद्योगों का तर्क है कि इस बदलाव से ऊर्जा लागत अधिक सस्ती और प्रतिस्पर्धी हो जाएगी। इससे उन विकृतियों को भी दूर किया जा सकेगा जो विद्युतीकरण में निवेश को कमजोर करती हैं। इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में शामिल हैं:
- एनर्जी यूके (Energy UK)
- ब्रिटिश उद्योग परिसंघ (Confederation of British Industry)
- ब्रिटिश रिटेल कंसोर्टियम (British Retail Consortium)
- इस्पात, सिरेमिक, रसायन और कागज उद्योगों के प्रतिनिधि
सरकार के सामने चुनौतियां
Adसरकार ने पहले ही घरों पर बोझ कम करने के लिए इनमें से कुछ लागतों को सामान्य कराधान में स्थानांतरित कर दिया है, और अब बड़े औद्योगिक ऊर्जा उपयोगकर्ता भी इसी तरह की राहत की मांग कर रहे हैं। यह मांग ऐसे समय में आई है जब मध्य पूर्व में तनाव ने ईंधन की कीमतों को और बढ़ा दिया है।
लेबर पार्टी ने पूर्व नेता कीर स्टार्मर के नेतृत्व में 2030 तक घरेलू बिलों में सालाना £300 तक की कटौती का वादा किया था, लेकिन पार्टी के सत्ता में आने के बाद से बिलों में लगभग उतनी ही वृद्धि हुई है। सरकार को रक्षा फंडिंग बढ़ाने जैसी अन्य प्रतिस्पर्धी खर्च दबावों का भी सामना करना पड़ रहा है, जिससे और राहत देना मुश्किल हो सकता है।
उद्योगों और निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
ऊर्जा-गहन उद्योगों के लिए, उच्च बिजली लागत एक महत्वपूर्ण परिचालन चुनौती है जो लाभप्रदता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करती है। यदि सरकार लेवी को स्थानांतरित करने के लिए सहमत होती है, तो यह इन क्षेत्रों को महत्वपूर्ण लागत राहत प्रदान कर सकती है, जिससे संभावित रूप से उनके वित्तीय स्वास्थ्य और निवेश आकर्षण में सुधार हो सकता है।
हालांकि, यदि सरकार अतिरिक्त बदलावों के बिना आगे बढ़ती है, तो उसके पास बिलों को काफी कम करने के लिए बहुत कम विकल्प बचते हैं, जब तक कि प्राकृतिक गैस की कीमतों में गिरावट न हो। इससे प्रभावित उद्योगों पर वित्तीय दबाव बना रह सकता है, जो ब्रिटेन में उनकी दीर्घकालिक व्यवहार्यता और निवेश योजनाओं को प्रभावित कर सकता है।