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अमेरिका-कनाडा व्यापार वार्ता के बीच कीस्टोन XL तेल पाइपलाइन फिर सुर्खियों में, ट्रम्प ने दिए पुनर्जीवित करने के संकेत

Summary
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने रद्द हो चुकी कीस्टोन XL तेल पाइपलाइन परियोजना को फिर से चर्चा में ला दिया है। यह बयान अमेरिका और कनाडा के बीच चल रही महत्वपूर्ण व्यापार वार्ता के दौरान आया है, जिससे इसके रणनीतिक महत्व का पता चलता है।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने विवादित कीस्टोन XL तेल पाइपलाइन परियोजना को फिर से सुर्खियों में ला दिया है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि इस परियोजना को "फिर से जगाया जा सकता है"। यह टिप्पणी अमेरिका और कनाडा के बीच चल रही व्यापार वार्ता के बीच आई है, जिससे ऊर्जा और व्यापार बाजारों में अटकलें तेज हो गई हैं।
कीस्टोन XL पाइपलाइन क्या थी?
कीस्टोन XL एक प्रस्तावित कच्चा तेल पाइपलाइन थी, जिसकी लंबाई लगभग 1,900 किलोमीटर (1,181 मील) थी। इसका उद्देश्य कनाडा के उत्तरी अल्बर्टा के ऑयल सैंड्स से प्रतिदिन 8,30,000 बैरल तेल को अमेरिका के ओक्लाहोमा स्थित प्रमुख भंडारण केंद्र और फिर खाड़ी तट की रिफाइनरियों तक पहुंचाना था।
पर्यावरण और स्वदेशी समूहों के कड़े विरोध के कारण, इस परियोजना का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इसे पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन ने खारिज कर दिया था, लेकिन ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल में इसे पुनर्जीवित किया। हालांकि, 2021 में राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा एक महत्वपूर्ण परमिट रद्द करने के बाद इस परियोजना को पूरी तरह से बंद कर दिया गया, जबकि इसका कुछ निर्माण कार्य शुरू हो चुका था।
कंपनियाँ और नई पाइपलाइन की योजना
इस परियोजना के पीछे कनाडाई कंपनी TC एनर्जी थी, जिसे पाइपलाइन रद्द होने से अरबों डॉलर का नुकसान हुआ। बाद में कंपनी ने अपने कच्चे तेल के कारोबार को एक नई इकाई, साउथ बो (South Bow) में बदल दिया, ताकि वह प्राकृतिक गैस पर ध्यान केंद्रित कर सके।
हालांकि, कनाडा से तेल उत्पादन में वृद्धि के पूर्वानुमानों के बीच, साउथ बो ने इस साल एक नई पाइपलाइन परियोजना का प्रस्ताव दिया है, जिसका नाम 'प्रेयरी कनेक्टर' (Prairie Connector) है।
Ad- यह 5,50,000 बैरल प्रति दिन की क्षमता वाली परियोजना होगी।
- यह अमेरिकी कंपनी ब्रिजर्स पाइपलाइन के साथ साझेदारी में अल्बर्टा से व्योमिंग तक बनाई जाएगी।
- इसमें कनाडा की तरफ पहले से बिछाए गए कुछ कीस्टोन XL पाइप का उपयोग किया जाएगा।
साउथ बो ने कहा है कि वह 2027 में प्रेयरी कनेक्टर पर आगे बढ़ने का फैसला करेगी, लेकिन कंपनी के सीईओ ने स्पष्ट किया है कि उन्हें आगे बढ़ने से पहले यह आश्वासन चाहिए कि अमेरिकी राष्ट्रपति का परमिट "स्थायी" होगा।
व्यापार वार्ता में पाइपलाइन की भूमिका
ट्रम्प द्वारा कीस्टोन XL का उल्लेख सिर्फ ऊर्जा नीति से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह अमेरिका-कनाडा व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है। रॉयटर्स (Reuters) के अनुसार, कनाडा के प्रधानमंत्री ने पिछले साल अक्टूबर में ट्रम्प के साथ व्यापार वार्ता के दौरान इस परियोजना को दोनों देशों के बीच सहयोग के एक संभावित क्षेत्र के रूप में उठाया था।
ट्रम्प का हालिया पोस्ट कनाडा पर नए टैरिफ लगाने की समय सीमा के आसपास आया, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस पाइपलाइन का भविष्य व्यापार सौदेबाजी में एक मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। कनाडा दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल निर्यातक है और अपने 90% से अधिक कच्चे तेल का उत्पादन अमेरिका को भेजता है, जिस पर कई अमेरिकी रिफाइनरियाँ निर्भर हैं।