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अमेरिकी बाजार में बिकवाली के बीच ऊर्जा क्षेत्र बना अव्वल, रिफाइनरी शेयरों में जोरदार उछाल

Summary
भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से ऊर्जा क्षेत्र ने बाजार की गिरावट को मात दी है। इस तेजी का नेतृत्व तेल उत्पादकों के बजाय मैराथन पेट्रोलियम और वैलेरो जैसी रिफाइनरी कंपनियां कर रही हैं।
अमेरिकी शेयर बाजार में हालिया बिकवाली के दौर में ऊर्जा क्षेत्र निर्विवाद रूप से सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर के रूप में उभरा है, जिसका नेतृत्व तेल रिफाइनरी कंपनियां कर रही हैं। यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब प्रौद्योगिकी (टेक) शेयरों में भारी गिरावट देखी जा रही है, जो बाजार की बदलती गतिशीलता को दर्शाता है।
बाजार में उलटफेर: ऊर्जा बनाम टेक
Investing.com के आंकड़ों के अनुसार, इस सप्ताह एनर्जी सेक्टर ईटीएफ (XLE) में 3.52% की मजबूत बढ़त दर्ज की गई, जबकि टेक सेक्टर ईटीएफ (XLK) में 4.45% की भारी गिरावट आई। इन दोनों क्षेत्रों के प्रदर्शन में लगभग 800 आधार अंकों का यह अंतर बाजार में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
इस बदलाव का मुख्य उत्प्रेरक भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमतों में एक ही सप्ताह में 12% की बढ़ोतरी हुई है, जो अप्रैल के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक छलांग है। इसके विपरीत, टेक शेयरों में गिरावट का कारण एआई (AI) से जुड़े शेयरों में अत्यधिक निवेश और लाभ-वसूली को माना जा रहा है।
रिफाइनरी कंपनियों ने मारी बाजी
दिलचस्प बात यह है कि ऊर्जा क्षेत्र में इस तेजी का नेतृत्व एक्सॉनमोबिल (ExxonMobil) या शेवरॉन (Chevron) जैसी बड़ी तेल उत्पादक कंपनियों के बजाय रिफाइनरी कंपनियां कर रही हैं।
Ad- मैराथन पेट्रोलियम (MPC): इस सप्ताह +7.79% बढ़ा।
- वैलेरो एनर्जी (VLO): इस सप्ताह +6.97% चढ़ा।
- फिलिप्स 66 (PSX): इस सप्ताह +6.88% की बढ़त दर्ज की।
इन कंपनियों का बेहतर प्रदर्शन "क्रैक स्प्रेड" की वजह से है, जो कच्चे तेल की लागत और गैसोलीन व डीजल जैसे तैयार उत्पादों की बिक्री मूल्य के बीच का मार्जिन होता है। जब भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतें अचानक बढ़ती हैं, तो यह मार्जिन अक्सर बढ़ जाता है, जिससे रिफाइनरियों का मुनाफा सीधे तौर पर बढ़ता है।
निवेशकों के लिए आगे का दृष्टिकोण
ऊर्जा व्यापार पर विश्लेषकों की राय बंटी हुई है। तेजी का समर्थन करने वालों का मानना है कि यदि ईरान के साथ तनाव बढ़ता है और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर आपूर्ति बाधित होती है, तो तेल की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
हालांकि, जेफरीज (Jefferies) जैसी फर्मों ने आगाह किया है कि तेल उत्पादक कंपनियां ऊंची कीमतों के बावजूद उत्पादन बढ़ाने में सावधानी बरत रही हैं और पूंजीगत अनुशासन बनाए हुए हैं। यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो तेल की कीमतों में आया "जोखिम प्रीमियम" तेजी से घट सकता है, जिससे हाल ही में बढ़े रिफाइनरी शेयरों में गिरावट आ सकती है।