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नेपाल-तिब्बत सीमा पर विनाशकारी बाढ़: नौ की मौत, 105 भारतीयों सहित सैकड़ों पर्यटक लापता

Summary
नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ से कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक भारतीयों सहित सैकड़ों पर्यटक लापता हो गए हैं। इस आपदा से नेपाल की जलविद्युत परियोजनाओं और चीन के साथ व्यापार मार्गों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
नेपाल और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की सीमा पर बुधवार को एक विनाशकारी आकस्मिक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों पर्यटक लापता हैं। इस घटना ने क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मानवीय और आर्थिक संकट पैदा कर दिया है, जिससे ऊर्जा और व्यापारिक बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
आपदा का पैमाना और कारण
रिपोर्टों के अनुसार, हिमालयी सीमा पर एक नदी में मिट्टी और चट्टानों का एक बड़ा हिस्सा गिरने से नेपाल की ओर विनाशकारी बाढ़ आ गई। नेपाल के पर्यटन प्राधिकरण ने पुष्टि की है कि इस क्षेत्र से कम से कम 384 यात्री लापता हैं, जिनमें 105 भारतीय, 93 नेपाली, 12 ब्रिटिश और तीन अमेरिकी नागरिक शामिल हैं।
आपदा का सटीक कारण तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्टों में भूकंप को एक संभावित कारक बताया गया है। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) के अनुसार, घटना से लगभग सात मिनट पहले क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) के एक विशेषज्ञ ने कहा कि इसका तात्कालिक कारण नेपाली हिस्से में लेंडे खोला नदी में एक बर्फ-चट्टान का हिमस्खलन हो सकता है।
आर्थिक और क्षेत्रीय प्रभाव
इस आपदा का महत्वपूर्ण आर्थिक प्रभाव पड़ा है, खासकर नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र पर। नेपाल के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ के कारण 430 मेगावाट की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है, जो देश की कुल 3.2 गीगावाट जलविद्युत क्षमता का 12% से अधिक है। कई जलविद्युत परियोजनाएं बाढ़ के पानी में बह गईं, जिससे देश के पावर ग्रिड पर दबाव बढ़ गया है।
Adचीन की ओर, इस भूस्खलन ने एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र, गिरोंग (Gyirong) बंदरगाह को प्रभावित किया है। चीन की आधिकारिक शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने बताया कि सीमा पार सड़कें, संचार और बिजली संपर्क टूट गए हैं। यह व्यवधान नेपाल और चीन के बीच व्यापार और परिवहन को महीनों तक प्रभावित कर सकता है, जैसा कि पिछले साल इसी तरह की बाढ़ के बाद हुआ था। इसके अलावा, भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों में बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है, क्योंकि यह नदी प्रणाली अंततः भारत में गंडक नदी के रूप में बहती है।
बचाव कार्य और भविष्य की चिंताएँ
दोनों देशों ने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू कर दिया है। चीन ने गिरोंग सीमा पर 574 बचावकर्ताओं को तैनात किया है, जबकि नेपाल में पुलिस और सेना बचाव कार्य में लगी हुई है। हालांकि, रासुवा जैसे पहाड़ी जिलों में खराब मौसम और दुर्गम इलाकों के कारण बचाव हेलीकॉप्टरों को उतरने में कठिनाई हो रही है।
विशेषज्ञों ने एक और बाढ़ की आशंका जताई है। ICIMOD के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा नदी पर अभी भी एक रुकावट बनी हुई है, जिसके टूटने पर दूसरी बाढ़ आ सकती है। अधिकारियों ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत हर संभव मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है।