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JPMorgan के जेमी डाइमन ने यूके को बैंक टैक्स बढ़ाने के खिलाफ चेताया: फाइनेंशियल टाइम्स

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Aug 17, 20262 min read
JPMorgan के जेमी डाइमन ने यूके को बैंक टैक्स बढ़ाने के खिलाफ चेताया: फाइनेंशियल टाइम्स

Summary

जेपी मॉर्गन चेस के सीईओ जेमी डाइमन ने यूके के चांसलर को चेतावनी दी है कि बैंकों पर कर बढ़ाने से नौकरियां दूसरे देशों में जा सकती हैं। यह बातचीत आगामी बजट से पहले वित्तीय क्षेत्र की लॉबिंग के बीच हुई है।

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Background

जेपी मॉर्गन चेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जेमी डाइमन ने यूनाइटेड किंगडम (यूके) के चांसलर को चेतावनी दी है कि बैंकों पर कर बढ़ाने से देश से वित्तीय नौकरियां बाहर जा सकती हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बातचीत आगामी बजट से पहले हुई है।

चेतावनी का विवरण

फाइनेंशियल टाइम्स ने मामले से परिचित लोगों का हवाला देते हुए बताया कि डाइमन ने पिछले हफ्ते यूके के चांसलर जॉन हीली से फोन पर बात की। इस बातचीत के दौरान, डाइमन ने आगाह किया कि ऊंचे करों के कारण अक्सर कंपनियां अपनी नौकरियां दूसरे स्थानों पर स्थानांतरित कर देती हैं।

अपनी बात को पुख्ता करने के लिए, डाइमन ने न्यूयॉर्क के वित्तीय क्षेत्र का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क शहर ने अपने उच्च कर बोझ के कारण वित्तीय नौकरियों में एक महत्वपूर्ण गिरावट देखी है। यह चेतावनी यूके के वित्तीय केंद्र के रूप में आकर्षण बनाए रखने की चुनौतियों को रेखांकित करती है।

बजट से पहले लॉबिंग और संदर्भ

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यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब वित्तीय सेवा क्षेत्र आगामी बजट से पहले एक बड़ी लॉबिंग की तैयारी कर रहा है। डाइमन को वैश्विक वित्त में सबसे प्रभावशाली हस्तियों में से एक माना जाता है, और उनकी राय का नीतिगत बहसों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

पिछले साल भी, डाइमन और अन्य बैंक अधिकारियों ने बजट से पहले ऊंचे करों के खिलाफ सफलतापूर्वक लॉबिंग की थी। उस समय, उन्होंने तत्कालीन चांसलर रेचल रीव्स के साथ चर्चा की थी, जब जेपी मॉर्गन कैनरी व्हार्फ में एक नए £3 बिलियन के लंदन मुख्यालय की योजना पर विचार कर रहा था।

बाजार और निवेशकों के लिए मायने

डाइमन की यह चेतावनी यूके के वित्तीय क्षेत्र के लिए नीतिगत अनिश्चितता को उजागर करती है। बैंकों पर किसी भी संभावित कर वृद्धि से यूके में काम कर रहे प्रमुख बैंकों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है, जिससे उनके शेयर की कीमतों में अस्थिरता आ सकती है। निवेशक आगामी बजट पर करीब से नजर रखेंगे ताकि वित्तीय क्षेत्र को प्रभावित करने वाले किसी भी नीतिगत बदलाव का आकलन कर सकें।

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