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काला सागर संकट: गेहूं की कीमतों में उछाल, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित

Summary
काला सागर क्षेत्र में बंदरगाहों और जहाजों पर बढ़ते हमलों के कारण गेहूं की वैश्विक आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं और मिस्र तथा इंडोनेशिया जैसे प्रमुख आयातक देशों के लिए खाद्य सुरक्षा का संकट गहरा रहा है।
काला सागर क्षेत्र में अनाज के बुनियादी ढांचे पर बढ़ते हमलों ने वैश्विक गेहूं आयातकों के लिए आपूर्ति संकट पैदा कर दिया है, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं और प्रमुख खरीदार देशों में खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। रूस और यूक्रेन द्वारा बंदरगाहों और जहाजों पर किए जा रहे हमलों के कारण शिपमेंट में भारी बाधा आ रही है।
बिगड़ते हालात और कीमतों पर असर
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, काला सागर से आपूर्ति में कमी की आशंका के चलते बेंचमार्क शिकागो गेहूं वायदा (Chicago futures) की कीमतों में जुलाई की शुरुआत से अब तक 17% से अधिक की वृद्धि हुई है। हाल के हफ्तों में हुए हमलों ने अनाज टर्मिनलों को बंद करने पर मजबूर कर दिया है, जिससे निर्यात के चरम मौसम के दौरान दर्जनों कार्गो की लोडिंग या तो रद्द कर दी गई है या स्थगित कर दी गई है।
आपूर्ति के लिए वैकल्पिक बाजारों की ओर देखने पर खरीदारों को काफी ऊंची कीमतें चुकानी पड़ रही हैं।
- काला सागर क्षेत्र के कार्गो की कीमत लगभग $260 से $280 प्रति टन है।
- इसके विपरीत, ऑस्ट्रेलियाई प्रीमियम व्हाइट गेहूं की कीमत एशिया के लिए लागत और भाड़े सहित लगभग $315 से $320 प्रति टन है।
- सबसे सस्ते अमेरिकी गेहूं की कीमत भी लगभग $305 प्रति टन है।
प्रमुख आयातक देशों पर बढ़ता दबाव
Adइस संकट का असर गेहूं के लगभग सभी बड़े आयातकों पर पड़ रहा है, जो अपनी जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए काला सागर क्षेत्र पर निर्भर हैं। दुनिया के सबसे बड़े गेहूं आयातक मिस्र ने 2026 की पहली छमाही में रूस और यूक्रेन से अपने कुल आयात का 82% से अधिक हिस्सा प्राप्त किया था। व्यापारियों का कहना है कि इसका सबसे ज्यादा असर मिस्र के निजी क्षेत्र पर पड़ रहा है।
एशिया में, अनाज प्रोसेसर ने जुलाई से सितंबर की अवधि के लिए लगभग 20 से 25 लाख टन काला सागर गेहूं बुक किया है, जो उनकी आयात मांग का लगभग 30% से 50% है। सिंगापुर स्थित दो व्यापारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई शिपमेंट के समय पर नहीं पहुंचने का डर बढ़ रहा है। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े खरीदार इंडोनेशिया ने इसी अवधि के लिए लगभग 600,000 टन का अनुबंध किया है।
शिपिंग में रुकावट और महंगे विकल्प
कई जहाज मालिक अब रूसी या यूक्रेनी बंदरगाहों पर जाने से हिचक रहे हैं। मिस्र के अलेक्जेंड्रिया बंदरगाह के एक व्यापारी हेशम सोलिमन ने कहा, "स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है।" पिछले हफ्ते, मिस्र के लिए अनाज लोड करने वाले एक जहाज पर रूस के नोवोरोस्सियस्क बंदरगाह के पास हमला किया गया था।
इस संकट के कारण जॉर्डन को इस महीने गेहूं और जौ के लिए अपने दो टेंडर रद्द करने पड़े, क्योंकि उसे बहुत कम बोलियां मिलीं। वहीं, ट्यूनीशिया ने आपूर्तिकर्ताओं को "फोर्स मेजर" (अप्रत्याशित घटना) का हवाला देने के खिलाफ चेतावनी दी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला तो बाजार को अगस्त के अंत तक आपूर्ति के लिए नए रास्ते खोजने होंगे।