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महीने के अंत में खरीदारी से यूरोजोन बॉन्ड यील्ड स्थिर, जुलाई की तेज बिकवाली पर लगाम

यूरोजोन के सरकारी बॉन्ड यील्ड में शुक्रवार को मामूली गिरावट देखी गई, क्योंकि महीने के अंत में हुई खरीदारी ने जुलाई के दौरान देखी गई तेज बिकवाली पर कुछ हद तक लगाम लगा दी। इस स्थिरता ने निवेशकों को हाल के नुकसान कोconsolidate करने का मौका दिया है, हालांकि बाजार की धारणा अभी भी सतर्क बनी हुई है।
बाज़ार में आज की हलचल
बेंचमार्क माने जाने वाले जर्मनी के 10-वर्षीय बंड की यील्ड थोड़ी गिरकर 3.15% पर आ गई, जो इस सप्ताह के दौरान पहुंचे कई हफ्तों के उच्च स्तर से एक मामूली वापसी है। इसी तरह, मौद्रिक नीति के प्रति संवेदनशील दो-वर्षीय जर्मन यील्ड भी घटकर 2.771% पर आ गई।
बॉन्ड की कीमतों में यह मामूली सुधार वैश्विक फिक्स्ड-इनकम बाजारों में कई दिनों के तीव्र बिकवाली के दबाव के बाद आया है। यह स्थिरता मुख्य रूप से महीने के अंत में होने वाले पोर्टफोलियो पुनर्संतुलन (portfolio rebalancing) के कारण है, जहां निवेशक अपने होल्डिंग्स को समायोजित करते हैं।
जुलाई में बिकवाली के कारण
जुलाई का महीना यूरोपीय सॉवरेन डेट बाजारों के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा, जिसमें जर्मन 10-वर्षीय यील्ड में महीने भर में लगभग 30 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हुई। इस बिकवाली के पीछे कई वैश्विक कारक थे:
Ad- केंद्रीय बैंकों का रुख: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अस्पष्ट संकेतों ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई।
- भू-राजनीतिक तनाव: मध्य पूर्व में नए सैन्य हमलों और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने मुद्रास्फीति के झटकों की आशंका को फिर से हवा दी।
- मुद्रास्फीति की चिंता: लगातार बनी हुई मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने यह डर पैदा कर दिया कि प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं।
आगे का दृष्टिकोण
भले ही शुक्रवार को यील्ड में नरमी आई, लेकिन निवेशक सतर्क हैं और आगामी यूरोजोन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। जर्मनी जैसे प्रमुख सदस्य देशों के शुरुआती आंकड़ों ने ऊर्जा और सेवाओं की ऊंची लागत के कारण लगातार मूल्य दबाव का संकेत दिया है, जिससे यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) पर अपनी सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने का दबाव बना हुआ है।
यील्ड में इस स्थिरता ने यूरोजोन में उधारी लागत को कुछ हद तक कम किया है, लेकिन लंबी अवधि की यील्ड अभी भी कई महीनों के उच्च स्तर के पास बनी हुई है। फिक्स्ड-इनकम ट्रेडर्स अगस्त में आने वाले मुद्रास्फीति के आंकड़ों और केंद्रीय बैंक की टिप्पणियों पर करीब से नजर रखेंगे ताकि यह पता चल सके कि बाजार में यह स्थिरता बनी रहती है या नहीं।