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फेड द्वारा दर वृद्धि की आशंका और तेल की कीमतों में उछाल से डॉऊ फ्यूचर्स में गिरावट

अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में सोमवार रात मिला-जुला कारोबार हुआ, क्योंकि निवेशक लेबर डे की छुट्टी के बाद बाजार में लौटे और मुद्रास्फीति, तेल की बढ़ती कीमतों और फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्धि की नई चिंताओं का सामना किया। डॉऊ जोन्स फ्यूचर्स में विशेष रूप से गिरावट देखी गई।
बाजार का प्रदर्शन
सोमवार रात के कारोबार में, प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों के वायदा अनुबंधों ने अलग-अलग दिशाओं में कारोबार किया।
- डॉऊ जोन्स फ्यूचर्स (Dow Jones Futures): 0.6% गिरकर 53,116.0 अंक पर आ गया।
- एसएंडपी 500 फ्यूचर्स (S&P 500 Futures): 0.1% की मामूली गिरावट के साथ 7,712.25 अंक पर था।
- नैस्डैक 100 फ्यूचर्स (Nasdaq 100 Futures): इसके विपरीत, 0.3% बढ़कर 29,639.75 अंक पर पहुंच गया।
यह हलचल शुक्रवार को वॉल स्ट्रीट पर आई गिरावट के बाद हुई है, जहां डॉऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.5% और एसएंडपी 500 0.4% टूटा था।
गिरावट के पीछे के कारक
बाजार की धारणा पर दो मुख्य कारकों का दबाव है: फेडरल रिजर्व की नीति पर बढ़ती अनिश्चितता और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें।
फेडरल रिजर्व पर बढ़ता दबाव
Adअगस्त की रोजगार रिपोर्ट उम्मीद से कहीं ज्यादा मजबूत रही, जिसमें अमेरिकी नियोक्ताओं ने 162,000 नौकरियां जोड़ीं। इस मजबूत आंकड़े ने इस संभावना को बढ़ा दिया है कि फेडरल रिजर्व मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए अपनी मौद्रिक नीति को और सख्त कर सकता है।
सीएमई फेडवॉच टूल (CME FedWatch) के अनुसार, अब व्यापारी फेड की 15-16 सितंबर की बैठक में 25-आधार-अंक की दर वृद्धि की लगभग 60% संभावना मान रहे हैं, जो रिपोर्ट से पहले 49% थी। यूबीएस (UBS) जैसे प्रमुख बैंकों ने भी अपने पूर्वानुमानों को संशोधित किया है, और अब वे इस साल दो दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं।
तेल की कीमतों में उछाल
मुद्रास्फीति की चिंताओं को बढ़ाते हुए, ब्रेंट क्रूड का भाव मंगलवार को लगभग $97 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। यह वृद्धि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान की आशंकाओं के कारण हुई है। ऊर्जा की ऊंची कीमतें फेड की नीतिगत दुविधा को और जटिल बना सकती हैं, क्योंकि इससे मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ता है।
निवेशकों की नजरें भविष्य के आंकड़ों पर
अब निवेशकों का ध्यान इस सप्ताह जारी होने वाले मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर है। गुरुवार को उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) और शुक्रवार को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़े आने वाले हैं। ये रिपोर्ट फेडरल रिजर्व के लिए यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगी कि वह ब्याज दरों में वृद्धि करे या नीति को अपरिवर्तित रखे।