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अमेरिकी टैरिफ की अनिश्चितता के बीच तांबे की कीमतें $15,000 प्रति टन के करीब पहुंचीं

Summary
लंदन मेटल एक्सचेंज पर तांबे की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं, जिसका मुख्य कारण अमेरिका द्वारा प्रस्तावित आयात शुल्कों को लेकर बनी अनिश्चितता और बाजार में बढ़ता सट्टा है।
अमेरिका में प्रस्तावित आयात शुल्कों को लेकर बनी अनिश्चितता और आगामी आर्थिक आंकड़ों के बीच तांबे की कीमतें अपने अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर बेंचमार्क तांबे का भाव लगातार चौथे कारोबारी दिन बढ़कर $14,779 प्रति मीट्रिक टन के नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया, जो $15,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब है।
टैरिफ की अनिश्चितता बनी प्रमुख वजह
विश्लेषकों के अनुसार, इस अभूतपूर्व तेजी का मुख्य कारण ट्रंप प्रशासन की आयात शुल्क नीतियों को लेकर चल रही अनिश्चितता है। अमेरिका ने परिष्कृत तांबे के आयात पर टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है, जिसे 2027 से 15% और 2028 में बढ़ाकर 30% किया जाना है। हालांकि, इस योजना की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जिससे बाजार में अटकलों का दौर तेज हो गया है।
पैनम्योर लिबरम (Panmure Liberum) के विश्लेषक टॉम प्राइस ने कहा, "जब किसी एक थीम पर इतना अधिक सट्टा पैसा बाजार में आता है, तो कोई भी बड़ा आंकड़ा लक्ष्य बन सकता है।" उनके अनुसार, इस सप्ताह तांबे का $15,000 के स्तर को छूना पूरी तरह से संभव है।
वैश्विक इन्वेंटरी में बड़ा बदलाव
Adटैरिफ की अनिश्चितता के कारण तांबे के वैश्विक भंडार में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है। बड़ी मात्रा में तांबा अमेरिका के COMEX-अनुमोदित गोदामों में भेजा जा रहा है, जिससे वहां की इन्वेंटरी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
- COMEX इन्वेंटरी: 695,624 टन के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर।
- LME और शंघाई इन्वेंटरी: दोनों एक्सचेंजों का संयुक्त स्टॉक घटकर 300,000 टन से थोड़ा अधिक रह गया है, जो COMEX के आधे से भी कम है।
आर्बिट्राज (Arbitrage) के अवसरों ने अमेरिकी तांबे के आयात को और बढ़ावा दिया है, जिससे LME और चीन के गोदामों पर दबाव बढ़ा है। चीन दुनिया में धातुओं का सबसे बड़ा उपभोक्ता है।