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चिप शेयरों में बिकवाली और मध्य पूर्व में तनाव से वैश्विक बाजार चिंतित

Summary
एशियाई और अमेरिकी बाजारों में सेमीकंडक्टर शेयरों में तेज गिरावट देखी जा रही है, जबकि अमेरिका-ईरान संघर्ष के बढ़ने के बावजूद तेल की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं।
वैश्विक बाजार इस सप्ताह दो प्रमुख चिंताओं से जूझ रहे हैं: सेमीकंडक्टर शेयरों में भारी बिकवाली और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम। ताइवान की TSMC जैसी कंपनियों के शानदार नतीजों के बावजूद एशियाई तकनीकी शेयरों में गिरावट आई, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने ऊर्जा बाजारों पर अनिश्चितता बढ़ा दी है।
चिप शेयरों पर भारी दबाव
एशियाई शेयर बाजारों में इस सप्ताह गिरावट का दौर जारी रहा, जिसका नेतृत्व चिप बनाने वाली कंपनियों ने किया। सैमसंग (Samsung) और एसके हाइनिक्स (SK Hynix) जैसी दिग्गज कंपनियों वाले दक्षिण कोरिया के KOSPI इंडेक्स में गुरुवार को 6% की भारी गिरावट आई, जो जून के अपने शिखर से लगभग एक चौथाई कम है।
यह बिकवाली अमेरिकी बाजारों में भी देखी गई, जहां फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स (Philadelphia Semiconductor Index) इस महीने अब तक लगभग 13% गिर चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि यह अस्थिरता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर हो रहे बड़े पूंजीगत व्यय की स्थिरता को लेकर चिंताओं और कोरिया जैसे बाजारों में लीवरेज्ड पोजीशन (leveraged positions) के खत्म होने को दर्शाती है।
मध्य पूर्व का तनाव और तेल बाजार
मध्य पूर्व में, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष एक नए खतरनाक चरण में प्रवेश कर गया है। ईरान द्वारा महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने के बाद, अमेरिका ने लगातार हमले किए हैं और ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी फिर से लागू कर दी है।
Adइन गंभीर घटनाओं के बावजूद, तेल की कीमतों पर इसका सीमित असर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को लगभग $85 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो कि पिछले युद्धकालीन उच्च स्तर से काफी नीचे है। ऐसा प्रतीत होता है कि निवेशक यह मानकर चल रहे हैं कि यह तनाव जल्द ही कम हो जाएगा। हालांकि, यह एक जोखिम भरा दांव हो सकता है क्योंकि पिछली बार के संघर्ष की तुलना में इस बार वैश्विक तेल भंडार कम हैं।
अन्य प्रमुख आर्थिक घटनाक्रम
बाजार की नजर अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं पर भी है:
- अमेरिकी बैंक: जेपी मॉर्गन (JPMorgan) और गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) जैसे बड़े अमेरिकी बैंकों ने बड़े सौदों और बाजार की अस्थिरता के कारण दूसरी तिमाही में शानदार मुनाफा दर्ज किया है।
- चीन की अर्थव्यवस्था: चीन की अर्थव्यवस्था दूसरी तिमाही में केवल 4.3% की दर से बढ़ी, जो उम्मीद से कम थी। हालांकि, चिप्स और प्रौद्योगिकी उपकरणों के मजबूत शिपमेंट के कारण जून में इसके निर्यात और आयात के आंकड़े बेहतर रहे।
- अमेरिकी मुद्रास्फीति: अमेरिका में मुख्य मुद्रास्फीति के आंकड़े उम्मीद से कम 2.6% (वार्षिक) पर आए, जिससे कुछ राहत मिली। हालांकि, फेडरल रिजर्व का कहना है कि मध्य पूर्व में तनाव से तेल की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई पर दबाव बन सकता है।